मुख्यमंत्री हरीश रावत अब छह सितंबर को दिल्ली जाएंगे। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भी जाना है। प्रदेश में मंत्रियों और विधायकों की बयानबाजियों ने उत्तराखंड की राजनीति में फिर गरमाहट घोल दी है।
शांत होने का नाम नहीं ले रही गुटबाजी
दरअसल उत्तराखंड के तमाम लंबित राजनीतिक मसले हैं जिन पर कांग्रेस आलाकमान को अब फैसला लेना ही होगा। उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। बहुगुणा कैंप से जुड़े नेताओं के साथ अब हरीश रावत कैंप के विधायकों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है।
दरअसल लंबे समय से बहुगुणा कैंप अपनी उपेक्षा और रावत सरकार की कार्यप्रणाली की शिकायतें दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से करता आ रहा है। बहुगुणा कैंप की ओर से आने वाले बयानों पर अभी तक मुख्यमंत्री कोई सीधी टिप्पणी नहीं कर रहे थे लेकिन हाल के बयानों के बाद वे भी मुखर हुए हैं।
केंद्रीय नेताओं के रखना चाहते हैं अपना पक्ष
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष केंद्रीय नेताओं के सामने दो टूक अपना पक्ष रखना चाहते हैं। पार्टी के कुछ नेता जिस तरह बयानबाजी कर गुटबाजी को हवा दे रहे हैं और कांग्रेस के मंत्री सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के निर्देशों का कैबिनेट के बाहर बयान देकर विरोध कर रहे हैं इसकी जानकारी भी दी जाएगी।
केंद्रीय नेता उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं को एक साथ बैठाकर राज्यसभा सीट पर उम्मीदवारी, बहुगुणा कैंप की उपेक्षा और प्रदेश कार्यकारिणी को अंतिम रूप जैसे फैसलों पर अपना फैसला सुनाएंगे। बहुगुणा कैंप सहयोगी (पीडीएफ) मंत्रियों को हटाकर कैबिनेट में अपने विधायकों को शामिल करने का दबाव भी लंबे समय से बना रहा है।
विधायक मयूख महर के बाद अब मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों में ढिलाई को लेकर गंगोलीहाट के विधायक नारायण राम आर्य ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राम ने निर्माण कार्य शुरू न होने पर पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर के साथ दो अक्तूबर से गांधी चौक पर आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।