किशनचंद्र को राजाजी में उप वन संरक्षक के पद पर तैनात करने से विवाद पैदा हो गया है। माना जा रहा है कि सरकार ने किशनचंद्र को एडजस्ट करने के लिए गोविंद पशु विहार उत्तरकाशी से इस पद को राजाजी में ट्रांसफर किया है।
यही नहीं किशनचंद्र के चक्कर में ही सरकार ने वन विभाग को बताए बिना राजाजी पार्क में ओएसडी का नया पद भी बना दिया। किशनचंद्र पर इस मेहरबानी के पीछे उनका कांग्रेस से संबंध होना बताया जा रहा है।
उनकी पत्नी बृजरानी कांग्रेस के टिकट से वर्ष 2012 में ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं।
किशनचंद्र पर गंभीर आरोप
गौरतलब है कि यूपी के समय में किशनचंद्र के घर से गुलदार की खाल और वन्य जीवों के अंग बरामद हुए थे, जिसकी जांच अभी तक चल रही है।
इसी वजह से किशनचंद्र के हरिद्वार और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती पर प्रतिबंध लगा है। लेकिन सरकार ने इतने गंभीर आरोपों की अनदेखी करते हुए किशनचंद्र को हरिद्वार क्षेत्र में ही तैनात कर दिया है।
तैनाती के पीछे चुनावी गणित!
राजाजी पार्क में कुल 12 रेंज हैं। इनमें से छह रेंज देहरादून जिले में और छह रेंज हरिद्वार जिले में आती हैं।
चुनावी गणित के लिहाज से नौ रेंज हरिद्वार लोकसभा सीट में आती हैं। सूत्रों के मुताबिक किशनचंद्र को राजाजी पार्क भेजना चुनावी रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है।
मार्च में सरकार ने राजाजी पार्क के डिप्टी डायरेक्टर एचके सिंह का तबादला कर उनकी जगह हल्द्वानी वन पंचायत के किशनचंद्र को तैनात कर दिया। इसके विरोध में एचके सिंह हाईकोर्ट चले गए।
एक के लिए बनाए दो पद
अदालत ने एचके सिंह के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार से तबादले की वजह पूछी।
इस बीच हाईकोर्ट से फैसला आने से पहले सरकार ने एचके सिंह का स्थानांतरण रद्द करते हुए उनकी तैनाती बहाल कर दी। लेकिन किशनचंद्र को वापस नहीं भेजा।
किशनचंद्र को एडजस्ट करने के लिए सरकार ने गोविंद पशु विहार से उप वन संरक्षक का पद राजाजी ट्रांसफर कर लिया। इस पद पर पुरोला में कार्यरत अधिकारी सुरेंद्र कुमार के लिए भी वन विभाग को बिना बताए पार्क में ओएसडी, गुर्जर पुनर्वास का पद बना दिया।
साथ ही शासन ने सुरेंद्र सिंह का वेतन बांस एवं रेशा विकास परिषद से देने का आदेश भी जारी किया।