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वादे करके भूल गए सीएम साहब

Thu, 24 Jul 2014 10:20 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में पंचायत और विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार दिलाने के लिए कई वादे किए।
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हजारों बीएड टीईटी प्रशिक्षित बेरोजगार आंदोलनरत
कैबिनेट बैठक में इनके प्रस्ताव भी पारित कर दिए गए, लेकिन चार माह बाद भी शासनादेश जारी नहीं किया गया।

आलम यह है कि नौकरी की मांग कर रहे शिक्षामित्र और हजारों बीएड टीईटी प्रशिक्षित बेरोजगार आंदोलनरत हैं।
ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि ये वादे क्या सिर्फ चुनावी ही थे।

शिक्षामित्र के तौर पर समायोजित करने का प्रस्ताव
चार मार्च 2014 को कैबिनेट बैठक में शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों को शिक्षामित्र के तौर पर समायोजित करने का प्रस्ताव पारित हुआ।

निर्णय हुआ कि 910 शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों को इस प्रतिबंध के अधीन समायोजित किया जाए कि उन्होंने निर्धारित योग्यता को पूर्ण कर लिया है।

प्रशिक्षण के बाद इनकी तैनाती दुर्गम, अति दुर्गम एवं आपदा प्रभावित विद्यालयों में करना तय किया गया। लेकिन अब तक समायोजन नहीं किया जा सका है। जबकि वर्ष 2008 से बेरोजगार शिक्षा आचार्य लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

टीईटी पास प्रशिक्षित बेरोजगारों को नियुक्ति का प्रस्ताव
पांच मार्च 2014 को कैबिनेट बैठक में शिक्षकों की भर्ती के लिए 1800 पद बढ़ाकर टीईटी पास प्रशिक्षित बेरोजगारों को नियुक्ति का प्रस्ताव पास किया गया।

अब तक जीओ जारी नहीं किया जा सका। हाल यह है कि सरकार ने पूर्व में शिक्षकों की जो भर्ती प्रक्रिया शुरू की उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। 25 हजार बेरोजगार सड़कों पर हैं।
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कैबिनेट में शिक्षा आचार्य और प्रशिक्षित बेरोजगारों के लिए जो प्रस्ताव पास हुए हैं। उनके शासनादेश के लिए प्रक्रिया चल रही है। बीच में एक के बाद एक कई चुनाव होने से मामला लटका हुआ था। देरी भले हुई है, लेकिन जो प्रस्ताव पास हुए हैं, उनका जीओ आना तय है।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी bsbora@ddn.amarujala.com और इस नंबर 9675202099 पर संपर्क कर सकते हैं।)
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