उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि उनकी सरकार प्रदेश में बदले की भावना से काम नहीं करेगी।
आपदा से उबारना प्राथमिकता पर
सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ कार्यों का निर्वहन करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को आपदा से उबारने का प्रयास प्राथमिकता पर रहेगा।
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हरीश रावत रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित बैठक में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पांच फरवरी को कैबिनेट की मीटिंग होगी। जिसमें केदारनाथ, चारधाम यात्रा व आपदा पुर्ननिर्माण को फोकस कर कार्य प्रणाली तय की जाएगी।
नई सरकार का भविष्य खतरे में
कांग्रेस विधायकों ने परंपरागत ढंग से एक लाइन का प्रस्ताव पास कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अधिकार जरूर दे दिया लेकिन विधानमंडल दल की बैठक में पर्यवेक्षकों व प्रभारी के सामने जो कुछ हुआ वह नई सरकार के भविष्य के लिए भी खतरे की घंटी है।
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खुलेआम मांग रखने वाले सहयोगियों को समझाने में कम समय लगा जबकि अपने विधायकों को समझाने में दिग्गज दर्नादन द्विवेदी, अंबिका सोनी और गुलाम नबी आजाद के पसीने छूट गए।
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दो साल पहले जो हरीश रावत अपने समर्थक विधायकों का संख्या बल दिखा रहे थे उन्हें भी विधायकों के संख्या बल के आगे नतमस्तक होना पड़ा। कांग्रेस के 33 विधायकों में 22 का आंकड़ा हरीश रावत और पर्यवेक्षकों को परेशान करने के लिए काफी था।
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हरीश रावत को प्रदेश के विकास के साथ अभी खुद के लिए जगह बनानी होगी। उन्हें अपनों के साथ उन्हें भी संतुष्ट करके दिखाना होगा जो खुलकर सामने आ गए हैं।