कांग्रेस के बीच सत्ता संग्राम शनिवार को भी जारी रहा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल से कांग्रेसी और पीडीएफ विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया। रावत ने भाजपा के संविधान का उल्लंघन करने के आरोप का जवाब अपनी ही शैली में दिया। कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अगर प्रभावी नहीं था तो भाजपा किस आधार पर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।
प्रदेश का सत्ता संग्राम अब कुछ हद तक हाईकोर्ट से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया हो, लेकिन उत्तराखंड में इसकी तपिश बरकरार है। शनिवार को दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से वार-पलटवार जारी रहा। भाजपा ने राज्यपाल से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की शिकायत की तो रावत ने भी भाजपा को कठघरे में खड़ा किया।
बीजापुर में मीडिया से मुखातिब हरीश रावत ने कहा कि भाजपा लगातार कांग्रेस और पीडीएफ के विधायकों को धमकाने और बरगलाने की कोशिश कर रही है। इसलिए राज्यपाल से कांग्रेस और पीडीएफ के विधायकों को सुरक्षा देने की मांग की है।
हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी नहीं तो भाजपा कैसे गई सुप्रीम कोर्ट
हरीश रावत को 27 अप्रैल का इंतजार
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रावत ने कहा कि दल बदल के खिलाफ जनजागरण के लिए 25 अप्रैल को हरिद्वार में पद यात्रा भी आयोजित करेंगे। उन्होंने भाजपा की ओर से उन पर लगाए गए संविधान का उल्लंघन करने के आरोप का भी जवाब दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर ही उन्होंने प्रदेश में 21 अप्रैल को मुख्यमंत्री दायित्व का निर्वहन किया था। अगर हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी नहीं था तो भाजपा बताए कि वह किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट गई। रावत के मुताबिक एक ही स्थिति का आकलन करने के लिए दो अलग-अलग मानक नहीं हो सकते।
भाजपा की है बड़ी हार
हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे के आदेश को रावत भाजपा की बड़ी हार बता रहे हैं। रावत के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से साफ तौर पर कहा है कि 27 की सुनवाई तक केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन नहीं हटाएंगी। साफ है कि सर्वोच्च न्यायालय भी मान रहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार राष्ट्रपति शासन हटा कर उत्तराखंड में सरकार बनाने का जोड़-तोड़ कर सकती है।
कैबिनेट के फैसले लेने पर भाजपा के पाले में डाल दी गेंद
हरीश रावत
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21 अप्रैल और 22 अप्रैल को एक के बाद एक दो कैबिनेट बैठक कर फैसले लेने के आरोप पर रावत ने भाजपा के पाले में ही गेंद सरका दी। रावत ने कहा कि बैठकों में जनहित के ही फैसले लिए गए। सर्किल रेट कम करने, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, पेयजल सहित जितने भी फैसले थे, वह प्रदेश की जरूरत को ध्यान में रखकर लिए गए। भाजपा अगर इन फैसलों से सहमत नहीं है तो खुलकर सबके सामने यह बात कहे।
सीबीआई जांच की मांग
2012 में हरिद्वार में ओनिडा फैक्ट्री में लगी आग में मारे गए 12 लोगों का मुद्दा उठाते हुए रावत ने कहा कि फैक्ट्री मालिक और प्रबंधक के खिलाफ जांच सीबीसीआईडी को दी गई है। रावत ने कहा कि इस मामले में कई नए तथ्य भी सामने आए हैं। हरिद्वार के कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात कर इसमें फैक्ट्री मालिक और प्रबंधक को बचाने के लिए यह सब किए जाने की शिकायत भी की है।
रावत ने कहा कि भाजपा का सीबीआई प्रेम जगजाहिर है। यह जांच अब सीबीसीआईडी को दी जा रही है। राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि यह जांच सीबीआई या एसआईटी को दी जानी चाहिए। माना जा रहा है कि रावत ने इस बहाने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को निशाने पर लिया है। यह मामला बहुगुणा के कार्यकाल का ही है।