उत्तराखंड में कर्मचारी संगठनों द्वारा बार-बार की जा रही हड़ताल के मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर तल्ख हो गए हैं। वे बोले कि ‘नो वर्क नो पे’ का आदेश कर दें तो हड़ताल वहीं टूट जाएगी।
सीएम ने कहा कि वैसे सारे मसले संवाद से हल हो सकते हैं। फिर भी असलहा बाबू के तबादले पर कलक्ट्रेट सात दिन के लिए बंद हो जाता है। लिपिक को डांटने पर समाज कल्याण में हड़ताल हो जाती है। ऐसा सिर्फ उत्तराखंड में ही होता है। ‘अगर मैं कल्याण करने पर तुल जाऊं तो फिर क्या होगा?
उभर आई सीएम की पीड़ा
बृहस्पतिवार को उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के अधिवेशन में मुख्यमंत्री हरीश रावत की पीड़ा उभर आई। शुरुआत में समझाने के अंदाज में बोले कि कर्मचारी संगठन, ट्रेड यूनियनों से प्रार्थना है कि संवाद से मसले हल करें। फिर रेलवे ट्रेड यूनियन, केंद्र सरकार की फेडरेशन का उदाहरण दिया कि यह संगठन हर महीने एक-दो मसले संवाद से हल कराते हैं। वे कितनी हड़ताल करते हैं। जल्दबाजी में किए गए काम के परिणाम अच्छे नहीं आते।