मुख्यमंत्री हरीश रावत विद्यालयी शिक्षा विभाग से नाराज है। उन्होंने बुधवार को विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान बोर्ड परीक्षा में सरकारी विद्यालयों के परिणाम में 10 प्रतिशत की गिरावट अफसरों को फटकारा। सीएम ने भविष्य के समुचित प्लान के लिए निर्देश भी दिए।
नाराजगी का आलम यह रहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अफसरों को यहां तक कहा कि लापरवाही और उत्तरदायित्वहीनता का इससे बड़ा कोई और उदाहरण नहीं हो सकता।
उन्होंने अफसरों के तर्क को कुतर्क बताया और कहा कि आपदा को इसका कारण बताना अकर्मण्यता का प्रतीक है। उन्होंने प्रमुख सचिव व अपर सचिव से पूछा कि आखिर विद्यालयी शिक्षा विभाग कर क्या रहा है?
'सचिवालय छोड़ें अधिकारी'
शिक्षकों की तबादला नीति को विद्यालयों में उनकी उपस्थिति और उनके स्कूल के परिणामों से जोड़ा जाए। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि वरिष्ठ अधिकारी सचिवालय छोड़कर क्षेत्र भ्रमण करे।
बेहतर परिणाम नहीं देने वाले अध्यापकों के लिए दंड का प्रावधान हो।
दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत जो अध्यापक लगातार 3 या 5 वर्ष बेहतर परिणाम देते हैं उन्हें उनकी पसंद के स्थान पर पोस्टिंग दी जाए। शासन के अफसर विद्यालयों का निरीक्षण करें।
मॉडल स्कूलों की योजना बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को चिन्हित करने को कहा। नवोदय विद्यालय की तर्ज पर ब्लॉक स्तर पर आवासीय मॉडल स्कूल बनाकर कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के बच्चों को इन मॉडल में स्कूल में पढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाने को कहा।
राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, एकलव्य विद्यालय व प्रस्तावित ब्लॉक स्तरीय मॉडल स्कूल के लिए अध्यापकों का अलग कैडर बनाये जाने का प्लान भी तैयार करने को कहा।
बैठक में संसदीय सचिव हेमेश खर्कवाल, प्रमुख सचिव एस राजू, सीएम के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह संधू, अपर सचिव राधिका झा समेत कई अफसर मौजूद रहे।