गुरु-शिष्य परंपरा से बने हैं शंकराचार्य : अविमुक्तेश्वरानंद
ज्योतिष पीठ की गद्दी संभालने के बाद पहली बार हरिद्वार पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का संतों ने भव्य स्वागत किया। मंगलवार को बड़ी संख्या में संत और अनुयायी कनखल स्थित शंकराचार्य मठ पहुंचे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज बुधवार को देवप्रयाग में गंगा स्नान करेंगे और 18 नवंबर को बदरीनाथ रवाना होंगे। 19 नवंबर को भगवान बदरीनाथ के कपाट शीतकालीन बंद होते वक्त उपस्थिति रहेंगे। भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलने और बंद होते वक्त ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य की उपस्थिति की सदियों पुरानी परंपरा है। 2017 के बाद से अब बदरीनाथ के कपाट बंद होते वक्त स्वामी अविमुक्तेवरानंद इस परंपरा को पुन शुरू करने जा रहे हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे संतों के काफिले के साथ कनखल स्थित शंकराचार्य मठ पहुंचे। स्वामी अविमुक्तेवरानंद ने कहा कि शंकराचार्य की गद्दी गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ी है। कोई अखाड़े या परिषद शंकराचार्य नहीं बना सकते हैं। वह परंपरानुसार ही ज्योतिष पीठ की गद्दी पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि वह भगवान बदरीनाथ धाम के लिए पहुंचे हैं। बुधवार को रघुनाथ मंदिर में पूजन कर देवप्रयाग में गंगा स्नान करेंगे। 17 नवंबर को ज्योतिष पीठ में रहेंगे। 18 और 19 को बदरीनाथ में रहेंगे। बदरीनाथ के कपाट बंद होने के बाद 20 नवंबर को पांडुकेशर में रहेंगे और 21 को ज्योतिषपीठ में वापस आ जाएंगे।
मठ में भारत साधु समाज, निर्मल एवं अणि अखाड़ों के संतों ने उनका भव्य स्वागत किया। संतों ने फूल मालाएं पहनाकर उनकी आरती उतारी। भारत साधु समाज के प्रवक्ता स्वामी ऋषिश्वरानंद ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का ज्योतिष पीठ पर अभिषेक होने से सनातन संस्कृति और सनातन धर्म गौरवान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही संत समाज की ओर से शंकराचार्य के अभिनंदन का भव्य आयोजन किया जाएगा।
बाबा हठयोगी ने कहा कि कुछ लोग शंकराचार्य पद को लेकर भ्रम की स्थिति बना रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही शंकराचार्य पद के लिए योग्य और परम विद्वान है। पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ज्योतिष पीठ सहित पूरे उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। इस दौरान महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी हरिहरानंद, महंत दुर्गादास, महंत सुतीक्षण मुनि, स्वामी दिनेश दास, मातृ सदन के अध्यक्ष स्वामी शिवानंद, महंत गोविंद दास, स्वामी कामेश्वर पुरी, महंत कपिल मुनि, महंत शुभम गिरी, महंत श्रवण मुनि सहित कई संत उपस्थित रहे।