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पंचायत चुनाव में इस बार बसपा के लिए होगी मुश्किल

Fri, 11 Sep 2015 01:18 PM IST
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, देहरादून
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हरिद्वार में होने वाले पंचायत चुनाव में इस बार बसपा की राह आसान नहीं होगी। पार्टी को पहले समर्थन देने के लिए प्रत्याशियों के चयन में मशक्कत करनी पड़ सकती है और उसके बाद प्रत्याशियों को जीत की दहलीज तक पहुंचाने में एडी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा।
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पिछले पंचायत चुनाव केदौरान जिले में पार्टी के छह विधायक थे। तब जिला पंचायत अध्यक्ष भी बसपा का ही बना था। इस बार पंचायत चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब पार्टी के दो में से एक विधायक निलंबित चल रहे हैं।

वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव हुए तो हरिद्वार जिले में बसपा के पास कई ऐसे चेहरे थे, जिन्होंने जिला पंचायत के चुनाव में प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया था। जिले की नौ में से छह विधानसभा सीटों पर बसपा का कब्जा था।
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बहादराबाद से मौहम्मद शहजाद, इकबालपुर से यशवीर सिंह, मंगलौर से काजी निजामुद्दीन, लंढौरा से हरिदास, भगवानपुर से सुरेंद्र राकेश और लालढांग से तस्लीमुद्दीन बसपा कोटे केविधायक थे। पार्टी के इस कैडर का लाभ जिला पंचायत चुनाव में मिला और जिला पंचायत अध्यक्ष का पद बसपा के खाते में गया।

तत्कालीन विधायक मौहम्मद शहजाद अपनी भाभी अंजुम बेगम को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में सफल रहे थे। लेकिन इस बार के पंचायत चुनाव में पार्टी के लिए स्थितियां इतनी अनुकूल नहीं हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा 11 में से तीन सीटों पर सिमट गई।

मंगलौर से सरवत करीम अंसारी, झबरेड़ा से हरिदास और भगवानपुर से सुरेंद्र राकेश विधायक बने। पार्टी ने बाद में हरिदास और सुरेंद्र राकेश को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इस बीच सुरेंद्र राकेश की मृत्यु हो गई और उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस केटिकट पर विधायक चुनी गई।

जबकि दूसरे विधायक हरिदास निलंबित ही चल रहे हैं। जिला पंचायत चुनाव में प्रचार केलिए सरवत करीम अंसारी ही एकमात्र विधायक बचे हैं।

निष्कासित पूर्व विधायक की भाभी हैं जिला पंचायत अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बसपा का कब्जा है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष अंजुम बेगम बसपा से निष्कासित किए जा चुके पूर्व विधायक मौहम्मद शहजाद की भाभी हैं। पार्टी फिर से इन पर दांव लगाए, इस बात के चांस कम ही दिखाई दे रहे हैं।

पार्टी को अभी पंचायत चुनाव केआरक्षण तय होने का इंतजार है। जिला पंचायत में पार्टी की ओर से समर्थित उम्मीदवार खड़े किए जाएंगे। जिला पंचायत सदस्य केचुनाव में प्रत्याशियों केजीतकर आने केबाद ही अध्यक्ष पद की रणनीति तैयार की जाएगी। पार्टी मजबूती केसाथ पंचायत चुनाव लड़ेगी।
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- सीपी सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा उत्तराखंड
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