हरकी पैड़ी एवं आसपास घाटों पर गंगा की सफाई कर आजीविका चलाने वाले दीपू और दीपक गंगा में डूबते लोगों के लिए संकटमोचक साबित होते हैं। दोनों सगे भाई कुशल तैराक हैं और हरकी पैड़ी एवं आसपास घाटों पर कई लोगों की जान बचा चुके हैं। महाकुंभ में मदद के लिए दोनों भाई हमेशा तैयार रहते हैं।
उत्तर हरिद्वार निवासी दीपू और दीपक हरकी पैड़ी एवं आसपास घाटों पर विसर्जित होने वाले सिक्के और बर्तनों को निकालकर गंगा की सफाई करने में भूमिका निभाते हैं। इसी से उनकी आजीविका भी चलती है। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद सिक्के और अन्य धातु चढ़ाते हैं।
कर्मकांडों में कई श्रद्धालुओं की ओर से कपड़े एवं पूजन सामग्री बहाई जाती है। अस्थि विर्सजन में भी सोने और चांदी के कण होते हैं। दोनों भाई गंगा में डुबकी लगाकर गंगा में विसर्जित होने वाली हर सामग्री बाहर निकालते हैं।
अपने काम की चीजों को समेट लेते हैं और बेकार सामग्री को डस्टबिन तक पहुंचाते हैं। मेला प्रशासन ने इनको परिचय पत्र भी दिए हैं। दीपू और दीपक बेहतरीन तैराक हैं। तेज पानी के बहाव की चपेट में आने से स्नान के दौरान कई श्रद्धालु बह जाते हैं। दीपू और दीपक गंगा में छलांग लगाकर श्रद्धालुओं को बचा लेते हैं।