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हरिद्वार: यहां घर से बाहर मिलता है अपनों का प्यार-दुलार, बोली-भाषा, खानपान से रम जाते हैं श्रद्धालु

Sat, 21 Aug 2021 02:11 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

हरिद्वार हिंदू आस्था से पवित्र धार्मिक स्थल है। देशभर से श्रद्धालु पर्व त्योहारों पर गंगा स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं। अधिकतर राज्यों की अपने-अपने श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हैं।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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धर्मनगरी की धर्मशालाएं देश के अलग-अलग राज्यों की अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हैं। इन धर्मशालाओं में ठहरने वाले श्रद्धालुओं को घर से बाहर घर जैसा माहौल मिलता है। श्रद्धालुओं का उनकी बोली-भाषा में स्वागत-सत्कार होता है। व्यंजनों से लेकर अपनी संस्कृति में रमने वाले श्रद्धालु हरिद्वार से लौटने के बाद भी भूल नहीं पाते हैं। 

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हरिद्वार हिंदू आस्था से पवित्र धार्मिक स्थल है। देशभर से श्रद्धालु पर्व त्योहारों पर गंगा स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं। अधिकतर राज्यों की अपने-अपने श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हैं। इनका निर्माण दशकों पूर्व उन्हीं के राज्यों के समाजसेवियों ने धर्मार्थ सेवा के लिए कराया है। पश्चिम बंगाल हो या आसाम या फिर जम्मू, अधिकतर राज्यों की धर्मशालाओं में उनकी सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है। हर राज्य की अपनी-अपनी धर्मशालाओं में वहीं के बोली भाषा के स्टाफ की तैनाती है। व्यंजन भी उन्हीं के राज्य के बनाए जाते हैं। आगंतुक काउंटर से लेकर हर कर्मचारी उन्हीं की बोली भाषा में बातचीत करते हैं। 

धर्मशालाओं में ठहरने से लेकर खाना होटलों की तुलना में बेहद सस्ता है। कमरा 200 रुपये से लेकर 800 रुपये तक है। खाना भी 50 रुपये थाली और 30-40 रुपये में नाश्ता मिलता है। घर के बाहर घर जैसा खाना, भाषा के लोग मिलने से श्रद्धालु रम जाते हैं। धर्मशाला संचालकों की ओर से श्रद्धालुओं को गाइड भी किया जाता है। 1990 के बाद अधिकतर धर्मशालाओं का आधुनिकीकरण हो गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के हिसाब से धर्मशालाओं में कक्ष बन गए हैं। 
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एडवांस बुकिंग करवानी होती है

40 साल से धर्मशाला का संचालन कर रहा हूं। धर्मशालाआ में श्रद्धालुओं को गुजराती खाना परोसा जाता है। यदि किसी श्रद्धालु को पांच दिन से अधिक ठहरना होता है तो एडवांस बुकिंग करवानी होती है। सामान्य तौर पर काउंटर बुकिंग भी होती है।
-मिथलेश सिन्हा, मैनेजर गुजराती धर्मशाला

कोरोनाकाल में श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है। श्रद्धालुओं के पहुंचने पर उनको घर जैसा माहौल दिया जाता है। श्रद्धालुओं को हरिद्वार घूमने के लिए गाइड किया जाता है। श्रद्धालु अपना खानपान और बोली भाषा के लोग मिलने से काफी खुश रहते हैं।
-रविचंद्रन, मैनेजर मद्रासी धर्मशाला

इन प्रदेशों की धर्मशालाएं
राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आसाम, मद्रास, पंजाब, वैश्य पंचायती धर्मशाला, सिंधी धर्मशाला, कुमाऊंनी धर्मशाला, गढ़वाली धर्मशाला। 

हरिद्वार में चार सौ धर्मशालाएं और तीन सौ आश्रम हैं। धर्मशालाओं का निर्माण दशकों पूर्व धर्मार्थ सेवा के लिए संबंधित राज्यों के समाजसेवियों ने अपने राज्य के श्रद्धालुओं के लिए कराया है।  
-विकास तिवारी, महामंत्री राष्ट्रीय धर्मशाला सुरक्षा समिति
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