दुर्भाग्य से दवा जारी करते हुए मंत्रालय ने पतंजलि के योगदान का जिक्र नहीं किया है। इस जानकारी को गत वर्ष ही विश्व स्वास्थ्य जर्नल में प्रकाशन के लिए भेज दिया गया था।
क्लिनिकल ट्रायल पशुओं और मनुष्यों पर किए जाते हैं
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि पतंजलि की ओर से तमाम बीमारियों के क्षेत्र में काम किया गया है। इनमें कैंसर भी शामिल है। हमारी दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल पशुओं और मनुष्यों पर किए जाते हैं। उसके बाद ही शुगर, बीपी, हार्ट, फेफड़ों, मस्तिष्क, पेट आदि से संबंधित दवाएं बाजार में उतारी गई हैं।
कोरोना का इलाज ढूंढने का काम पतंजलि ने मार्च 2020 में शुरू कर दिया था। कोरोनिल का प्रयोग देश के अनेक बड़े अस्पताल भी करते हैं। परंतु आयुर्वेद को सम्मान नहीं देना चाहते। यह बुरी बात है। एलोपैथी में क्योर नामक शब्द नहीं है। जबकि आयुर्वेद रोगों को जड़ से मिटा देने वाली विद्या है।