कोरोनाकाल में असमय काल का ग्रास बने लोगों को आखिरकार मुक्ति मिल ही गई। देवोत्थान सेवा समिति की ओर से लावारिस अस्थियों को कनखल स्थित सती घाट पर पूर्ण विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और 100 किलो दूध के साथ गंगा में विसर्जित की गई। संस्था ने लगातार 20 वीं अस्थि कलश विसर्जन यात्रा में 9216 लोगों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर लावारिस आत्माओं को गंगा की गोद दी।
हजारों लावारिस अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करती चली आ रही है समिति
इस अवसर पर श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि देवस्थान सेवा समिति की ओर से किया जाने वाला लावारिस अस्थियों का विसर्जन कार्य अत्यंत पुण्यदायी है। लावारिस का वारिस बनने के लिए वह संस्था बेहद सराहनीय कार्य कर रही है। संस्था के महामंत्री विजय शर्मा ने बताया कि देवोत्थान सेवा समिति से जुड़े लोग वैसे तो 19 सालों से निरंतर देशभर से एकत्र करके हजारों लावारिस अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करते चले आ रहे हैं।
इस बार खास बात ये है कि इन अस्थियों में ज्यादातर अस्थियां उन लोगों की थी, जिनकी मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई है। विशेष तौर पर कोरोना से मरने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली और पूरे एनसीआर के श्मशान घाटों से अस्थियां उठाकर वो हरिद्वार लाए। उन्होंने कहा कि 2003 में उन्होंने इस काम की शुरूआत की थी और अब तक उन्होंने लगभग 15100 लोगों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर उन्हें मोक्ष दिला चुके हैं।
संस्था के अध्यक्ष सतेंद्र चौधरी ने बताया कि आगे भी उनका ये अभियान जारी रहेगा। पुण्यदायी अभियान सेवा समिति के प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. विशाल गर्ग ने यह काम करने वाले लोगों को भगीरथ की संज्ञा दी। श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि लावारिसों का परिजन बन अस्थियों का विसर्जन करना बड़ा महान कार्य है। इस मौके पर योगेंद्र सिंह मान, किरणदीप कौर, रामकिशन लोहिया, शारदा प्रसाद, नमन शर्मा, आशीष कश्यप, निखिल कप्तान सिंह, गोपाल शर्मा, गोपाल वर्मा, जगदीश लाल पाहवा, पंडित राजीव तुंबडिया, उमेश कौशिक आदि मौजूद रहे।