अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने जो निर्णय कुंभ को लेकर लिया है, उससे संत समाज उत्साहित है। अब मेला प्रशासन की ओर से कुंभ से जुड़े कार्यों को तत्काल धरातल पर उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में ऐसा कुंभ हो कि श्रद्धालु प्रयागराज कुंभ को भूल जाएं।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, हंस फाउंडेशन की माता मंगला, आरएसएस के प्रांत प्रचारक युद्धवीर, अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी, क्षेत्रीय शारीरिक प्रमुख नरेश शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, सक्षम के राष्ट्रीय अध्यक्ष दयाल पंवार, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि, एम्स ऋषिकेश के निदेशक डॉ. रविकांत, डॉ. रश्मि त्यागी रावत, उद्योगपति जेसी जैन, शिवालिकनगर पालिकाध्यक्ष राजीव शर्मा, लक्सर नगरपालिक अध्यक्ष अंबरीष गर्ग।
बताया, क्यों वापस लिए लॉकडाउन के मुकदमे
नेत्र कुंभ के उद्घाटन के दौरान सीएम ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन में कारसेवा से लौटते समय का किस्सा सुनाते हुए कहा कि उन्हें पुलिस ने पकड़कर हवालात में डाल दिया था। जमानत अगले दिन होनी थी, इसलिए हवालात में बिजनौर के हत्यारोपी के साथ रात काटनी पड़ी। सीएम ने कहा कि उन्होंने कोई संगीन अपराध नहीं किया था, फिर भी लॉकअप में रात गुजारनी पड़ी। इसी तरह कोविड संक्रमण फैलने के बाद लॉकडाउन में लोग जनसेवा के लिए सड़कों पर उतरे। कोई दवा तो कोई राशन कपड़े बांटने निकला। पुलिस ने उनके ऊपर मुकदमे दर्ज किए। इसीलिए, लॉकडाउन के दौरान दर्ज साढ़े चार हजार मुकदमे वापस लिए हैं।
नेत्र कुंभ में 75 हजार नजर के चश्मे बांटने का लक्ष्य
सक्षम संस्था की ओर से प्रयागराज कुंभ में डेढ़ लाख मरीजों की आंखों की जांच कर चश्मे बांटे गए थे। संस्था की ओर से हरिद्वार कुंभ में 75 हजार चश्मे बांटने का लक्ष्य रखा गया है। नेत्र कुंभ में सात स्थानों पर आंखों की जांच और चश्मों का वितरण शुरू हो चुका। दो स्थानों पर पहले ही शिविर शुरू हो चुुके थे। आंखों की जांच से लेकर चश्मे निशुल्क होंगे।
‘जमीन बनाने वालों के सामने मंच पर बैठना अटपटा लगता है’
सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से उनको काफी कुछ सीखने को मिला है। वहीं से उनकी राजनीतिक जमीन तैयार हुई है। जो जमीन तैयार करते हैं, वह सामने कभी नहीं आते हैं, लेकिन पीछे से सारा काम करते रहते हैं। सीएम ने कहा कि ‘उन्हीं के बलबूते आज मैं मंच पर बैठा हूं। जमीन बनाने वालों के सामने मंच पर बैठना बड़ा अटपटा लगता है, लेकिन क्या करूं, यह मजबूरी है।