कुंभ मेला सीएमओ डॉ. एसके झा ने बताया कि बॉर्डर और मेला क्षेत्र में रैंडम सैंपलिंग की जा रही है। अतिसंवेदनशील राज्यों से आने वाले परिवारों के एक-दो सदस्यों के रैंडम सैंपल लिए जाएंगे।
बॉर्डर पर पॉजिटिव आने पर सभी लोगों को लौटा दिया जाएगा। मेला क्षेत्र में पॉजिटिव मिलने वालों को कोविड केयर सेंटरों में आइसोलेट किया जाएगा। जांच के लिए 33 टीमें बनाई हैं। इनमें दस निजी और 23 सरकारी हैं। 10 हजार से अधिक एंटीजन सैंपल रोजाना लिए जाएंगे।
कोविड के लिहाज से अतिसंवेदनशील 12 राज्यों से आने वाले यात्रियों की राज्य सीमा पर अनिवार्य रूप से कोरोना जांच की जाएगी। संक्रमण की पुष्टि होने पर यात्री और उसके पूरे समूह को लौटा दिया जाएगा।
महाकुंभ 2021: अब आसमान से देखिए कुंभनगरी के नजारे, 30 अप्रैल तक चलेगी हेली सेवा
शासन ने महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान से आने वाले यात्रियों को कोविड आरटीपीसीआर रिपोर्ट लाने की सलाह दी है।
महाकुंभ-2021 आज से विधिवत शुरू हो गया है, लेकिन मेला प्रशासन के दावों के बावजूद बैरागी कैंप क्षेत्र में संतों के लिए अभी तक अवस्थापना सुविधाएं मुहैया नहीं पाई हैं। अब जाकर कहीं बिजली के खंभों में तार खींचे जा रहे हैं तो कहीं धूल-मिट्टी से बचाव के लिए सड़कों पर रोड़ी-गिट्टी बिछाई जा रही है। शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संत जूझ रहे हैं। कछुआ चाल से अवस्थापना निर्माण कार्य होने से संतों में नाराजगी है।
बैरागियों के तीन अखाड़ों से हजारों की संख्या में साधु-संत जुड़े हैं। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की पहल पर 17 मार्च को मेला प्रशासन की ओर से अखाड़ों के लिए बैरागी कैंप क्षेत्र में भूमि आवंटित की गई। इससे पहले केंद्र सरकार की कोविड मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) छावनियों के लिए भूमि आवंटन में आड़े आ रही थी।
भूमि आवंटन नहीं होने से संन्यासी अखाड़ों ने अपने संतों के लिए अखाड़ा परिसर एवं दूसरी जगहों पर छावनियां लगवा दीं। बैैरागी संतों का पहला शाही स्नान 12 अप्रैल को है। भूमि आवंटन के बाद अधिकतर छावनियां तैयार हो गई हैं। हजारों की संख्या में बैरागी संत भी छावनियों में पहुंच गए हैं। अप्रैल पहले सप्ताह तक बाकी बैरागी संत भी छावनियों में प्रवेश कर जाएंगे। पहले सप्ताह में ही पेशवाई और धर्म ध्वजाएं भी स्थापित होंगी।
पर, मेला प्रशासन की ओर से अभी तक नए छावनी क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं। कई छावनियों के लिए आवंटित भूमि का अभी तक समतलीकरण नहीं हो सका है। क्षेत्र में धूल-मिट्टी उड़ रही है। पानी छिड़काव की व्यवस्था नहीं है। धूल-मिट्टी से बचाव के लिए सड़कों पर रोड़ी और गिट्टी बिछाई जा रही है। बिजली के खंभे पहले ही खड़े कर दिए थे। कुछ जगहों पर तारें खींचकर लाइन जोड़ दी गई है, लेकिन कई इलाकों में अब जाकर तार खींचकर पानी की लाइन बिछाई जा रही है। गंगा तट के नजदीक छावनियों के पास शौचालय तक नहीं लगाए गए हैं। संतों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
बैरागी कैंप क्षेत्र में अवस्थापना के कार्य रात-दिन युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। संतों के छावनियों में प्रवेश करने तक सभी सुविधाएं सुचारु हो जाएंगी।
-हरबीर सिंह, अपर मेलाधिकारी
आम आदमी पार्टी ने हरिद्वार महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि हरिद्वार महाकुंभ शुरू हो गया है, लेकिन राज्य सरकार की तैयारियां नाकाफी हैं।
कहा कि भाजपा के मंत्री और नेता ही सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, जो शर्मनाक पहलू है। कहा कि सरकार हरिद्वार महाकुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों को कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट के साथ आने की बात कर रही है, लेकिन जिन लोगों को हरिद्वार आने के बाद कोरोना संक्रमण हुआ तो उनके इलाज के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
पार्टी प्रवक्ता आनंद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कोरोना को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आ रही है। कोरोना से निपटने के लिए राज्य सरकार के पास कोई कारगर योजना नहीं है।
महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़ की तरह यदि उत्तराखंड में भी कोरोना ने पांव पसार लिया तो इससे निपटने में सरकार पूरी तरह नाकाम होगी और हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।