आरोपियों की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और रिश्वत मांगने या लेने का उन पर कोई आरोप नहीं है। जमीन का उपयोग परिवर्तन वैधानिक प्रक्रिया से हुआ है। सभी दस्तावेज जांच एजेंसी के पास पहले से मौजूद हैं। लिहाजा उनकी गिरफ्तारी न की जाए। उन्होंने यह वादा भी किया कि वे जांच में सहयोग करेंगे। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
इस पर अभियोजन की ओर से कहा गया कि जमीन की वास्तविक कीमत बेहद कम थी। बावजूद इसके नगर निगम को 56.94 करोड़ रुपये में खरीदवाया गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच अभी जारी है। तीनों आरोपियों ने पहले हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जिसे वापस ले लिया था। जबकि, इस तथ्य को उन्होंने वर्तमान याचिका में शामिल नहीं किया। ऐसे में तीनों को अग्रिम जमानत का अधिकार नहीं है। इस पर कोर्ट ने तीनों की याचिका नामंजूर कर दी।