मूसलाधार बारिश से कहीं बाढ़ तो कहीं रास्ते बंद
उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होते ही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही तेज बारिश के चलते कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन से कई सड़कें बंद हो गई हैं।
देहरादून में बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिला, जहां मसूरी की तुलना में अधिक वर्षा दर्ज की गई। शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई, जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई कॉलोनियों में पानी घरों तक घुस गया, वहीं सड़कों पर जलभराव के जाम भी देखने को मिला। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है।
एक एनएच, दो स्टेट हाइवे समेत 98 मार्ग बंद
प्रदेश में भूधंसाव, भूस्खलन के कारण सोमवार को 98 मार्ग बंद रहे। देहरादून में देहरादून-मसूरी राज्य मोटर मार्ग पर भूधंसाव हुआ। इसके कारण मार्ग बंद हो गया। जिले में कुल 10 मार्ग बंद हैं। अल्मोड़ा में सात, बागेश्वर में 10 और रुद्रप्रयाग में सात ग्रामीण मार्ग बंद हैं। चमोली जिले में सिमली-ग्वालदम एनएच मलबा आने के कारण बंद है। यहां पर 25 ग्रामीण मार्ग भी आवाजाही ठप है। पिथौरागढ़ में 14 ग्रामीण मोटर मार्ग, नैनीताल में एक राज्य मार्ग और पांच ग्रामीण मोटर मार्ग, उत्तरकाशी में दो ग्रामीण मोटर मार्ग, बागेश्वर में 10, चंपावत में तीन और टिहरी में नौ ग्रामीण मोटर मार्ग बाधित हैं। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किच्छा में 130 एमएम बरसात हुई
राज्य में मेघ जमकर बरस रहे हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से जारी बुलेटिन के अनुसार किच्छा में 130 एमएम बारिश हुई है। जबकि देहरादून जिले के मालदेवता क्षेत्र में 103 एमएम बारिश रिपोर्ट हुई। हाथी बड़कला में 75 एमएम बारिश हुई। अल्मोड़ा में 52 एमएम, खटीमा में 75, ऊखीमठ में 77 एमएम बरसात हुई है। वहीं, नदियों का जल स्तर भी खतरे के निशान के पास पहुंचा है। इसमें उत्तरकाशी में भागीरथी नदी का जल स्तर 1119 मीटर तक पहुंच गया, जो कि स्थिर बना हुआ है। यहां पर नदी का खतरे का जल स्तर 1123 मीटर है। बदरीनाथ में अलकनंदा नदी का जल स्तर 3111 तक पहुंच गया, जबकि यहां पर नदी का खतरे का जल स्तर 3113 मीटर है। नंद केसरी में पिंडर नदी देव प्रयाग में गंगा नदी का 456 मीटर, ऋषिकेश में 338.22 मीटर और हरिद्वार में 291.18 मीटर पर पहुंच गया।