पूर्व सीएम हरीश रावत ने गंगा स्नान के बाद अखाड़ों में जाकर प्रमुख संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। संतों से मुलाकात के बाद उन्होंने संतों के समक्ष कुंभ की उपेक्षा को लेकर अपनी बात भी रखी। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी बात का समर्थन करना या न करना संतों का अपना निजी अधिकार है। हरीश रावत सबसे पहले श्री पंचायती जूना अखाड़ा पहुंचे। इसके बाद पूर्व सीएम ने माया देवी मंदिर में पूजा अर्चना की और आशीर्वाद लिया। यहां से वे पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव और मनसा देवी मंदिर अध्यक्ष श्रीमंहत रविंद्रपुरी से मिले। यहां श्रीमंहत रविंद्र पुरी से उनकी अधिक बातचीत नहीं हुई।
उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठयोगी का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने उनसे कुंभ कार्यों को लेकर चर्चा भी की। रावत ने दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि को भगवा अंग वस्त्र भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस बीच हरीश रावत ने बैरागी कैंप में करीब आधे घंटे तक पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद से वार्ता की। उन्होंने महानिर्वाणी अखाड़ा श्री महंत रविंद्र पुरी और पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा के कोठारी महंत दमोदर दास, श्रीमंहत महेश्वर दास और मंहत कमल दास से भी आशीर्वाद प्राप्त किया।
‘मदन जी कभी हमारी भी माला पहना करो’
महानिर्वाणी अखाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक आमने सामने आ गए। मदन कौशिक पहले से ही अखाड़ा में बैठे हुए थे। जैसे ही मदन कौशिक ने हरीश रावत को देखा तो वे उठकर उनके पास चले आए। मदन कौशिक ने अचानक हरीश रावत के गले में फूलों की माला डाल दी। एक बार को पूर्व मुख्यमंत्री भी हैरान रह गए, लेकिन अचानक उन्होंने एक माला शहरी विकास मंत्री के गले में डाल दी, लेकिन यहां भी वे कैबिनेट मंत्री की चुटकी लेना नहीं भूले। हरीश रावत ने कहा कि मदन जी कभी हमारी भी माला पहना करो।
मुझ पर लगा कांग्रेसी होने का आरोप
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने हरीश रावत से बातचीत के दौरान कहा कि वे जब भी कुंभ की व्यवस्थाओें और कार्यों को लेकर कुछ कहते हैं तो उनपर कांग्रेसी होने का आरोप लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि उनपर कांग्रेस की ऐसी मुहर लगी है जो छूटे नहीं छूट रही है।