परंपरानुसार जूना अखाड़ा के रमता पंच हरिद्वार से खेड़ामढ़ी बरेली के लिए रवाना हो गए। पंच परमेश्वर चारों मढ़ियों के रमता पंच श्रीमहंत निरंजन भारती (चार मढ़ी) श्रीमहंत रामचंद्र गिरि (चौदह मढ़ी), श्रीमहंत शांता नंद गिरि (तेरह मढ़ी) और श्रीमहंत दूज गिरि (सोलह मढ़ी) के नेतृत्व में लाव लश्कर एवं माल असवाल के साथ दोपहर बाद शुभ मुहूर्त में कूच किया। रमता पंच देश भ्रमण करेंगे और 2024 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ में मिलेंगे।
थानापति ने लिया आशीर्वाद
श्री आनंद भैरव मंदिर परिसर में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि का थानापति नीलकंठ गिरि ने शॉल ओढ़ाकर और माला अर्पित कर आशीर्वाद लिया। धर्मध्वजा उतारे जाने के दौरान पूर्व सभापति श्रीमहंत सोहन गिरि, श्रीमहंत उमाशंकर भारती, सचिव श्रीमहंत मोहन भारती, श्रीमहंत महेशपुरी, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि, अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि, वरिष्ठ महामंत्री श्रीमहंत केदारपुरी, लालभारती, विवेकपुरी, रकता पुरी, राजेंद्र गिरि, रणधीर गिरि, आजाद गिरि, पुजारी श्रीमहंत सुरेशानंद सरस्वती, निर्माण मंत्री श्रीमहंत शैलजा गिरि आदि मौजूद रहे।
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपने दो महामंडलेश्वरों के साथ संन्यास की दीक्षा ले ली है। जूना अखाड़े के संरक्षण एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि को अपना गुरु मानते हुए उनसे दीक्षा ली। दीक्षा लेने के बाद आचार्य महामंडलेश्वर अब लक्ष्मी नारायणनंद गिरि नाम से जानी जाएंगी।
हरिद्वार कुंभ में किन्नर अखाड़े ने पहली बार जूना अखाड़ा के सहयोगी बनकर शाही स्नान किया। जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि की पहल पर किन्नर अखाड़े को जूना का हिस्सा बनाया गया। महाकुंभ के विधिवत समापन के बाद किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण ने अपने महामंडलेश्वर भवानी शंकरानंद और पवित्रानंद के साथ मिलकर संन्यास की दीक्षा ले ली।
विधि विधान से संन्यास दीक्षा होने के बाद सभी के आगे गिरी जुड़ गया है। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायणनंद गिरि ने बताया कि सनातन धर्म में अखाड़ों की अपनी परंपराएं हैं। परंपराओं के साथ अपना गुरु चुनना होता है। जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि उनके पिता तुल्य हैं। उन्होंने किन्नर अखाड़े के संतों को सम्मान दिया। उनको ही अपना गुरु मानकर दीक्षा ली है। दीक्षा से पहले जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि से आशीर्वाद लिया।