हरकी पैड़ी को जीरो जोन घोषित किया गया है। चप्पे-चप्पे पर पैरामिलिट्री और पुलिस बल के साथ बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वाड, जल पुलिस की टीमें तैनात रहेंगी। हरकी पैड़ी क्षेत्र को छोड़कर अन्य घाटों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु भी डुबकी लगाएंगे।
दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं के लिए मेला पोर्टल पर पंजीकरण के साथ 72 घंटे पहले की कोविड निगेटिव रिपोर्ट लाने की अनिवार्यता है। मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गया।
हरिद्वार में 72 घाट हैं। इनमें हरकी पैड़ी क्षेत्र के सात घाट छोड़कर अन्य घाटों पर श्रद्धालु तड़के चार से शाम छह बजे तक डुबकी लगा सकेंगे। श्रद्धालुओं को मास्क पहनने के साथ शारीरिक दूरी का पालन करना होगा। जिले के बॉर्डर और मेला क्षेत्र में कोरोना जांच के लिए रैंडम सैंपलिंग भी होगी। बिना पंजीकरण और कोविड निगेटिव रिपोर्ट नहीं मिलने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। एसओपी का उल्लंघन करने वाले श्रद्धालुओं का चालान किया जाएगा।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि संन्यासियों के साथ महाकुंभ का पहला शाही स्नान नहीं कर पाएंगे। स्नान की तैयारियां पूरी करवाने के बाद वह महाशिवरात्रि मनाने गुजरात के जूनागढ़ पहुंच गए हैं।
हरिद्वार महाकुंभ की अधिसूचना एक अप्रैल से प्रभावी होगी, लेकिन संन्यासी अखाड़े का सबसे बड़ा स्नान पर्व महाशिवरात्रि है। कुंभ की अवधि कम होने पर अखाड़ों ने पुरजोर विरोध किया, लेकिन श्रीमहंत हरि गिरि ने अखाड़ों और सरकार के बीच मतभेद दूर करने में भूमिका निभाई। इसके बाद ही 11 मार्च के महाशिवरात्रि पर शाही स्नान के लिए मेला प्रशासन और सरकार की ओर से व्यवस्थाएं दुरुस्त की गईं।
हरि गिरि ने बताया कि जूनागढ़ के भवनाथ स्थित गृगी कुंड में प्राचीनकाल से नागा संन्यासियों का रात 12 बजे शाही स्नान होता है। इसे मिनी कुंभ भी कहा जाता है। वह भाननाथ मंदिर के प्रबंधक हैं। लिहाजा, व्यवस्था संचालन के लिए वह जूनागढ़ आए हैं। 14 मार्च को हरिद्वार पहुंच जाएंगे।