विशेषज्ञों का दावा सिडकुल स्थापना के बाद घटती गई गुणवत्ता
सिंचाई विशेषज्ञों के अनुसार, हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना के बाद से नहर का प्रदूषण लगातार बढ़ा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बहादराबाद क्षेत्र के आसपास स्थित कुछ नालों से सिडकुल की फैक्टरियों का दूषित पानी भी नहर में छोड़ा जा रहा है। इसके कारण नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है।
प्रदूषण के स्रोत शहर और गांव दोनों बराबर जिम्मेदार
नहर में प्रदूषण का मुख्य कारण शहर की गंदगी सीधे गंगा में गिरने और बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक गंदे नालों का सीधा गंगा में जाना है। इन नालों से निकलने वाला दूषित जल नहर के पानी को जहरीला बना रहा है। सिंचाई विशेषज्ञों ने हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना के बाद से प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सिडकुल की फैक्टरियों का दूषित पानी भी कुछ नालों के माध्यम से नहर में छोड़ा जा रहा है जिससे जलीय पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
पत्र लिखने पर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
सिंचाई विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस संबंध में पहले ही पत्र लिखा था लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय निकाय भी इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के एसडीओ अनुज बंसल ने कहा कि गंगा के प्रदूषित होने से मछलियों, मेंढकों और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकाय इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
बोले जिम्मेदार
जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों की उदासीनता चिंताजनक है। इस विषय में उच्च स्तर पर वार्ता की जाएगी। अगर जल्द ठोस योजना नहीं बनीं तो गंगा की शुद्धता की स्थिति और गंभीर होगी। -अनुज बंसल, एसडीओ उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
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गंग नहर में गिरने वाले नालों की एक रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीवर की शिकायत पूर्व में भी मिली है। -दयानंद सरस्वती, अपर मेलाधिकारी