महाकुंभ के दौरान कोरोना की जांच में कैसे फर्जीवाड़ा किया गया, इसका खुलासा 40 पेज की प्रारंभिक जांच में हुआ है। जांच तैयार करने में अधिकारियों को कई दिनों का समय लगा।
इसी जांच रिपोर्ट के बाद मैक्स सर्विस, हिसार की नलवा लैब और दिल्ली की डॉक्टर लाल चंदानी लैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। ऐसे में जांच रिपोर्ट के बाद कई बड़े अधिकारियों की गर्दन फंसना भी तय माना जा रहा है।
शासन ने इस मामले की जांच पीसीएस अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी को सौंपी थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर इस रिपोर्ट को तैयार किया।
इसके बाद इस रिपोर्ट को हरिद्वार जिला प्रशासन के पास भेज दिया गया। जिसके बाद हरिद्वार जिला प्रशासन ने सीडीओ समेत तीन सदस्यों की टीम को जांच के आदेश दिए थे।
कुंभ मेले के दौरान कोविड जांच का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार सैंपल लेने के लिए अनुबंध पर रखे गए कई कर्मचारियों को केवल इसलिए नौकरी से हाथ धोना पड़ा कि उन्होंने फर्जी रिपोर्ट तैयार करने से इनकार कर दिया था। इन लोगों के विरोध करने के बाद भी उनकी आवाज दब गई।
सूत्रों के अनुसार एक लैब ने कुछ युवाओं को सैंपल लेने और जांच के लिए अनुबंध पर रखा था। इन लोगों को जबरन निगेटिव रिपोर्ट देने को कहा गया।
बताते हैं कि युवाओं ने इसका विरोध किया। विरोध करने वालों को काम से हटाया गया था। बताया जाता है कि युवाओं ने प्रशासन से इसकी शिकायत कर लैब के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।