जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में मंगलवार को आगामी कुंभ मेला के दौरान कोरोना संक्रमण के रोकथाम को लेकर सरकारी और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों, रुड़की सेना अस्पताल और प्राइवेट लैब संचालकों के साथ बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत निजी अस्पतालों को बेड और एंबुलेंस रिजर्व रखनी होगी।
डीएम सभागार रोशनाबाद में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जांच बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर प्राइवेट लैब भी जांच कर सकेंगे। डीएम ने कुंभ मेले के दौरान स्पेशलिस्ट डाक्टरों से ऑनकॉल ड्यूटी के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल स्टॉल लगाकर वालंटियर के रूप में भी सेवाएं दे सकते हैं।
कुंभ मेला सभी के लिए चुनौती के साथ अपनी कार्यक्षमता दिखाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट और सरकारी संस्थान मिलकर कार्य करेंगे। मुख्य चिकित्साधिकारी एसके झा ने कहा कि कुंभ मेले के दौरान कोरोना संक्रमण रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी से एकजुट होकर कार्य करना होगा।
मेला अधिकारी दीपक रावत ने जूना अखाड़ा अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेमगिरी और सचिव महेशपुरी के साथ गुजरावाला भवन स्थित महामंडलेश्वर मां शुभमूर्ति द्वार और ज्वालापुर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ पांडेयवाला क्षेत्र का निरीक्षण कर कुंभ की तैयारियां परखी। मेलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से तत्काल व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
श्रीमहंत प्रेमगिरी ने कहा कि मां शुभमूर्ति द्वार के नीचे गंगा का पानी आता है। जिससे पुल के नीचे सिल्ट जमा हो जाती है। मेलाधिकारी ने लोनिवि के अधिशासी अभियंता से कहा कि जहां से गंगा का पानी पीछे आता वहां बालू के कट्टे डालकर क्षेत्र को समतलीकरण किया जाए। पुल के नीचे दो-तीन जगहों पर पेयजल लाइन में लीकेज है।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को बृहस्पतिवार तक लीकेज ठीक करने के निर्देश दिए। श्रीमहंत प्रेम गिरि ने बताया कि इसी क्षेत्र में पेशवाई का रथ तैयार करने का कार्य होगा। जिसे तैयार करने वाले कारीगर यही रहेंगे। उनके लिए पानी की जरूरत होगी। मेलाधिकारी ने अधिकारियों को पानी की उचित व्यवस्था करने और पुल के नीचे वाले क्षेत्र के तट पर लोहे की जाली लगाकर घेरी गई जगह की खसरा-खतौनी की जांच करने के निर्देश भी दिए।
इसके बाद मेलाधिकारी संतों के साथ ज्वालापुर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ पांडेयवाला पहुंचे। मेलाधिकारी ने सिद्धपीठ पांडेयवाला क्षेत्र में पानी की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि पानी का कनेक्शन दिए जाएंगे। मेलाधिकारी ने शौचालयों का निरीक्षण भी किया। मेलाधिकारी ने प्राचीन सिद्धपीठ पांडेय वाला परिसर की प्रतिदिन साफ-सफाई करवाने के लिए एमएनए को निर्देश दिए। ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने बताया कि जल्दी ही हाईमास्ट लाइट लग जाएंगी। मेलाधिकारी ने बिजली के खंभों पर भी लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मेलाधिकारी ने कहा कि एक एंबुलेंस और उसमें एक डॉक्टर की नियमित ड्यूटी रहेगी।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत एक बार फिर हरिद्वार में संतों की शरण में पहुंच रहे हैं। इस बार रावत संतों से कुंभ को लेकर बातचीत करेंगे। रावत बुधवार को हरिद्वार में संतों से बातचीत करेंगे। उनके मुताबिक वे संतों से कुंभ को लेकर बातचीत करेंगे। रावत के मुताबिक प्रदेश सरकार कुंभ के आयोजन को गंभीरता से नहीं ले रही है।
राज्य को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह पहली बार नहीं है कि हरीश रावत संतों से मिलने हरिद्वार जा रहे हैं। इससे पहले भी वे हर की पैड़ी से होकर बह रही गंगा की धारा को एस्केप चैनल घोषित करने पर संतों से मिलकर माफी मांग आए थे। हरीश रावत के इस माफीनामे का असर यह हुआ कि सरकार को अलग-अलग आदेश जारी करने पड़े और अब भी सरकार उस विवाद का पूरी तरह हल नहीं कर पाई है।
हरीश रावत के कार्यकाल में देवप्रयाग तक का क्षेत्र मेला क्षेत्र घोषित किया गया था। इस समय सरकार ऐसा करने के मूड में नहीं है। सरकार मेले को कोरोना संक्रमण को देखते हुए सीमित रखना चाह रही है और हरीश रावत लगातार मेले को व्यापक स्तर पर आयोजित करने पर जोर दे रहे हैं। दूसरी ओर, संतों को मनाने में भी सरकार को खासा पसीना बहाना पड़ रहा है। ऐसे में इस बार भी हरीश रावत का संतों की शरण में जाना प्रदेश सरकार के लिए एक और चुनौती खड़ी कर सकता है।