कोतवाल राकेंद्र कठैत ने बताया कि धर्म संसद के संयोजक आनंद स्वरूप, सागर सिंधु महराज, अमृतानंद, प्रबोधानंद गिरि, शिवानंद के खिलाफ कोरोना संक्रमण एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं में वाद दायर किया गया है। इसकी रिपोर्ट पुलिस कोर्ट में दाखिल करेगी।
एक ही बैरक में रहे वसीम रिजवी और महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद
महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के मामले में जेल भेजे गए महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद का व्यवहार रातभर सामान्य रहा। उन्होंने जेल प्रशासन से कोई खास डिमांड नहीं की। सोमवार को अखबार पढ़कर समय व्यतीत किया। यहां वसीम रिजवी और नरसिंहानंद को एक ही बैरक में रखा गया है।
गाजियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर के महंत एवं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद को शनिवार रात पुलिस ने महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में सर्वानंद घाट से उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी की गिरफ्तारी के विरोध में अनशन पर बैठे थे। शनिवार रात उन्हें कुछ देर कोतवाली में बैठाने के बाद सीने में दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
रविवार को पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने बताया कि यति नरसिंहानंद ने किसी भी प्रकार की कोई खास मांग नहीं की। रात भर वह सोए। सुबह उठकर उन्होंने पहले योग और प्राणायाम किया। इसके बाद पूजा-पाठ किया और सुबह का नाश्ता करने के बाद दोपहर का भोजन भी किया। वहीं, सोमवार का दिन उन्होंने अखबार पढ़कर व्यतीत किया।
बिस्कुट खिलाकर खत्म कराया अमृतानंद का अनशन
शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के नफरती भाषण मामले में गिरफ्तारी के बाद सर्वानंद घाट पर अनशन पर बैठे संत अमृतानंद का स्वास्थ्य बिगड़ने पर अन्य संतों ने उनका अनशन समाप्त कराया। रविवार रात प्रतिकार सभा के बाद बिस्कुट खिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया गया।
वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी की गिरफ्तारी के विरोध में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद और अमृतानंद सर्वानंद घाट पर धरने पर बैठे थे। इसके बाद यति नरसिंहानंद को भी महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। अमृतानंद अकेले ही धरने पर बैठे रहे। उन्होंने अन्न और जल त्याग दिया था। इसके बाद उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा था। संतों के आग्रह पर उन्होंने रसाहार पर अनशन करने का निर्णय लिया था।
यति नरसिंहानंद को जेल भेजे जाने के बाद स्वामी अमृतानंद के स्वास्थ्य को देखते हुए धर्म संसद से जुड़े अन्य संतों ने बिस्कुट खिलाकर उनका अनशन समाप्त करा दिया। धर्म संसद के आयोजक स्वामी आनंद स्वरूप का कहना है कि संतों के आग्रह के बाद अमृतानंद का अनशन समाप्त करा दिया गया है। संत स्वस्थ रहेंगे तो आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी।