इसे विचित्र संयोग ही कहा जाएगा कि गुरुवार को अर्द्घकुंभ का पहला स्नान संपन्न हो गया। लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी भी लगा ली पर न अभी गुरु कुंभ राशि में गए हैं और न सूर्य ने मेष राशि में प्रवेश ही किया है।
इन दोनों राशियों में संक्रमण के बगैर हरिद्वार में कुंभ भरता ही नहीं है। पहला स्नान संपन्न हो गया किंतु सूर्य नारायण ने तो मकर राशि तक में प्रवेश नहीं किया।
हरिद्वार कुंभ तब भरता है जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश कर लें और सूर्य मेषस्थ हो जाएं। वर्तमान में एक वर्ष के लिए गुरु सिंह राशि में विराजमान हैं। यही वजह है कि नासिक और उज्जैन में सिंहस्थ होने पर कुंभ भर रहे हैं।