उत्तराखंड के अति दुर्गम प्राइमरी स्कूल बुड़म के शिक्षक नवीन जोशी के लिए रविवार का दिन भी अन्य दिनों की तरह है। वे इस दिन भी शेष छह दिनों की तरह नौनिहालों को शिक्षण कार्य कराते हैं। शिक्षा की ये नायाब तस्वीर संचार सुविधा से कटे और रोड से करीब 16 किमी दूर बुड़म गांव की है।
उनकी बदौलत बुड़म प्राइमरी स्कूल का शैक्षिक वातावरण नई ऊंचाई छू रहा है। बच्चों का शैक्षिक स्तर भी बेहतर है। बुड़म के अति दुर्गम स्कूल में 2005 से तैनात नवीन जोशी (47) ने दूरदराज में पढ़ाई नहीं होने के कलंक को अपने तौर-तरीके से धोया। वे नियमित रूप से छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं।
न केवल कार्य दिवसों में, बल्कि रविवार को भी नन्हे-मुन्नों को पढ़ाते हैं। बच्चे उनके पढ़ाने के ढंग को पसंद करते हैं, तो अभिभावक उनके समर्पण की कद्र। बीएड के अलावा एमएससी पास जोशीजी इससे पहले केंद्रीय विद्यालय में भी पढ़ा चुके हैं।
जहां कोई नहीं जाता वहां जाना चाहते हैं नवीन
आमबाग (टनकपुर) निवासी श्री जोशी ने तबके शिक्षाधिकारी से गुजारिश कर ऐसे स्कूल में भेजने का आग्रह किया था, जहां कोई नहीं जाना चाहता हो। वे उस समय से अब तक इसी स्कूल में तैनात हैं। श्री जोशी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी सुविधा नहीं होने से साधनहीन परिवार के नौनिहालों का भविष्य अनिश्चित रहता हैं।
इन परिस्थितियों ने उन्हें दूरदराज के बच्चों के बीच शिक्षण कार्य को प्रेरित कार्य किया। क्षेत्र के लोग उनकी सेवा के कायल हैं। डांडा संकुल केंद्र के समन्वयक दिवाकर भट्ट का कहना है कि शिक्षक नवीन जोशी ने बुड़म स्कूल के शैक्षिक स्तर को ऊंचाई दी है। वे शिक्षण कार्य के अलावा बच्चों को सामान्य ज्ञान और व्यक्तित्व विकास की भी जानकारी देते हैं।
शिक्षण से कन्नी काटने वाले अध्यापकों की प्रवृत्ति देश के लिए खतरनाक है। काम के प्रति जिम्मेदारी का कम होते अहसास से भविष्य की नींव पर असर पड़ रहा है। प्राइवेट स्कूलों की भीड़ ने बाजारवाद को उभारा है, साथ ही सरकारी शिक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। शिक्षक ही नहीं, हर सरकारी कर्मी-अधिकारी के बच्चों को भी सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
- नवीन जोशी, शिक्षक
दून रीजन के चार शिक्षकों को मिला CBSE अवार्ड
सीबीएसई की ओर से शिक्षक दिवस पर दिए गए सीबीएसई अवार्ड में देहरादून रीजन के चार शिक्षक सम्मानित हुए। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने चार शिक्षकों को सम्मानित किया।
रीजन के तीन शिक्षक सीबीएसई के नेशनल अवार्ड के लिए चयनित हुए हैं, जिनका राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार (आज) को सम्मान किया जाएगा। सीबीएसई से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में गुरुवार को आयोजित सम्मान समारोह में देशभर से आए 48 शिक्षकों और मेंटर्स को सीबीएसई अवार्ड दिया गया।
इन्हें मिला सीबीएसई अवार्ड
- डॉ. मोइन अहमद, पीजीटी, आर्मी पब्लिक स्कूल, हेमपुर, ऊधमसिंह नगर
- प्रीति गोयल, प्रिंसिपल, सन वैली इंटरनेशनल स्कूल, गाजियाबाद
- केएन पांडे, प्रिंसिपल, बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हरिद्वार
- डॉ. मैरी थॉमस, प्रिंसिपल, समर विले स्कूल, ग्रेटर नोएडा
इन्हें मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
- डॉ. गुनमीत बिंद्रा, प्रिंसिपल, वेल्हम ब्वायज देहरादून
- डॉ. अनिल शर्मा, प्रिंसिपल, बिड़ला विद्या मंदिर, नैनीताल
- डॉ. महेश प्रसाद, प्रिंसिपल, स्टेप बाई स्टेप स्कूल, नोएडा
आठ शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार
शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रदेश के आठ शिक्षकों को भी शुक्रवार को दिल्ली में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इन शिक्षकों में चार प्रारंभिक शिक्षा, तीन माध्यमिक और एक संस्कृत महाविद्यालय के हैं।
मिलेगा सेवा विस्तार
राष्ट्रपति पुरस्कार के तहत शिक्षकों को ताम्रपत्र और प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसके अलावा सेवानिवृत्त पर दो साल का सेवा विस्तार मिलेगा।
ये शिक्षक होंगे पुरस्कृत
- गंगा दत्त जोशी हेड मास्टर प्राथमिक विद्यालय धामगीर चमोली
- गीता नौटियाल सहायक अध्यापिका जूनियर हाईस्कूल बिनोली रुद्रप्रयाग
- सुशीला चौबे सहायक अध्यापिका जूनियर हाईस्कूल फोर्ती चंपावत
- बसंती प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय बागेश्वर
- हरिनंदन जोशी प्रिंसिपल हाईस्कूल धूनघाट चंपावत
- कुलविंदर कौर संधू गुरुनानक गर्ल्स इंटर कॉलेज रुद्रपुर
- कुसुम नौटियाल प्रवक्ता जीजीआईसी कर्णप्रयाग चमोली
- उमेश प्रसाद बहुगुणा संस्कृत महाविद्यालय उजेली उत्तरकाशी