शहर क्षेत्र में समलैंगिक रिश्ताें का मामला सामने आया है। एक साल पहले से लापता दो सहेलियाें ने शनिवार को रायपुर थाने पहुंचकर गुम होने की बात को नकार दिया। दो टूक कहा कि वे बालिग हैं और एक साथ जीना और मरना चाहती हैं। परिवार का कोई सदस्य उनकी जिंदगी में दखल न दे। पुलिस ने दोनों के परिजनों को बुलाकर उनके फैसले से अवगत भी करा दिया है। विरोध करने पहुंचे हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताआें से पुलिस की नोक-झाेंक भी हुई।
दोनों सहेलियां 18 अगस्त 2018 को लापता हो गईं थी। इनमें से एक की गुमशुदगी रायपुर थाने और दूसरी की नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज हुई थी। शुरुआत के दिनाें में ही इन युवतियों ने परिजनों से बात कर वापस आने से इंकार कर दिया था। जांच के दौरान यह साफ हो गया था कि दोनों युवतियां आपस में सहेली हैं और एक साथ गई हैं। परिजन लगातार अपने लाड़ली बेटियों को वापस लाने का प्रयास कर रहे थे। दबाव के चलते दोनों सहेलियों ने शनिवार को रायपुर थाने में पहुंचकर अपनी मंशा से अवगत करा दिया।
एसओ चंद्रभान अधिकारी ने महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में दोनों युवतियों से काफी देर तक बातचीत की। युवतियों का कहना है कि वे कहीं लापता नहीं हुई। अपनी मर्जी से जीवनयापन कर रही हैं। वे बालिग हैं और उन्हें अपनी जिंदगी का फैसला लेने का अधिकार है। वे दोनों साथ रहना चाहती हैं, इसलिए दोनों के परिवार का कोई भी सदस्य उन्हें परेशान न करे।
इस पर पुलिस ने दोनों सहेलियों के परिजनों को बुलाकर बातचीत करा दी। परिजनों ने दोनों को समझाने भरसक प्रयास किया, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहीं। परिजनाें की घर वापसी की अपील को ठुकराते हुए उन्होंने कहा कि वो एक दूसरे के साथ रहकर खुश हैं। इस दौरान दोनों सहेलियों के अलग-अलग संप्रदाय की होने के कारण लोग थाने पर एकत्र हो गए। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। इस दौरान पुलिस से नोक-झाेंक भी हुई। एसओ ने कहा कि दोनों सहेलियां बालिग हैं। कानूनी लिहाज से पुलिस उन पर किसी तरह का दबाव नहीं बना सकती है। बाद में दोनों सहेलियों को पुलिस सुरक्षा में शहर से बाहर भेज दिया गया।
दोनों काल सेंटर में करती हैं काम
दोनों सहेलियां हरियाणा के एक शहर में काल सेंटर में काम करती हैं और एक साथ रहती हैं। इन युवतियों ने पुलिस को अपने बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी है। पुलिस ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। यदि कोई उन्हें प्रताड़ित करता है तत्काल नजदीकी थाने में इसकी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
गत वर्ष समलैगिंग संबंधों को मिली थी मान्यता
सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष सितंबर में समलैंगिक संबंधों पर अपना अंतिम फैसला सुनाया था। इसके तहत कोर्ट ने साफ कर दिया था कि समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा। आईपीसी की धारा 377 पर करीब 24 साल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया था। इससे पहले इन संबंधों पर दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान था।