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हौसले को सलाम, पैर से लिखकर दिया एग्जाम

Mon, 08 Sep 2014 09:35 AM IST
नवीन सक्सेना/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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अगर कुछ करने का जुनून और हौसला है तो विकलांगता भी राह में बाधा नहीं बनती। इसे सच कर दिखाया है उत्तराखंड के जवाहर नगर, पंतनगर (ऊधमसिंह नगर) निवासी विजय सिंह देउपा (22 वर्ष) ने।
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इसी जुनून और हौसले की बदौलत विजय ने पहले हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे अंक से पास की। अब विजय उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) से बीए की परीक्षा दे रहे हैं।

शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण विजय हाथ से नहीं लिख पाते हैं, लेकिन उन्होंने पैर से लिखकर इस कमजोरी को भी मात दे दी है।

एमबी पीजी कॉलेज में इन दिनों यूओयू की परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षा केंद्र पर शनिवार को प्रथम पाली में बीए प्रथम वर्ष के समाजशास्त्र का पेपर देने पहुंचे विजय का हौसला देख हर कोई हैरान था।
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शतरंज का खिलाड़ी है विजय

मेज पर बैठकर परीक्षा दे रहा विजय उत्तर पुस्तिका में पैर के अंगुठे और अंगुली में पेन फंसाकर लिखने में व्यस्त था। हर कोई यह देखकर उसके हौसले को सलाम कर रहा था।

यूओयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. गोविंद सिंह ने विजय के पिता हरक सिंह देउपा की एप्लीकेशन के आधार पर उन्हें पेपर हल करने के लिए एक घंटा अतिरिक्त दिया है। विजय ने बीए में समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, हिंदी और पर्यावरण विषय लिए हैं।

विजय के जुनून से मुक्त विवि के आब्जर्वर प्रो. बीसी उप्रेती और रीजनल डायरेक्टर डा. रश्मि पंत काफी प्रभावित दिखे। उन्होंने कॉलेज में अन्य छात्रों को विजय का उदाहरण भी दिया।

विजय विकलांग होने के बावजूद शतरंज का अच्छा खिलाड़ी है। उसके पिता हरक सिंह देउपा ने बताया कि विजय शतरंज की कई राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं जीत चुका है। हरक सिंह लालकुआं की सेंचुरी पेपर मिल में नौकरी करते हैं।

विजय जब दो माह का था तो बीमार होने की वजह से वह विकलांगता का शिकार हो गया। उसे थोड़ा बोलने में भी परेशानी होती है।
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