खस्ताहाल रोड से सुबह 10.30 बजे देहरादून जिले के द्वारा गांव पहुंचने पर सबसे पहले बंद स्कूल के दर्शन हुए। गांव के रास्ते पर खेलते बच्चों से बात करते-करते आगे बढ़े तो बंद दुकान की छत पर एक पार्टी का झंडा लगा दिखा।
खेती के कार्यों में व्यस्त दिखे लोग
आगे बढ़ने पर कुछ और दलों के झंडे दिख गए। गांव के लोग खेती के कार्यों में व्यस्त दिखे। गाय-बकरियों को जंगल से लाती महिलाएं साथ में घास भी ला रही थीं।
तीन तरफ से नदी से घिरे द्वारा गांव के लोगों को पीने का पानी तीन-तीन दिन बाद नसीब होता है। पानी की लाइनें तो बिछा दी गई हैं, लेकिन उनमें पानी कम ही आता है।
स्टैंडपोस्टों पर पानी के लिए बर्तनों की लाइनें लगी थी। पूछने पर बताया गया कि दो-तीन दिन में पानी आता है और जल्दी चला जाता है। जलस्रोत गांव से करीब दो किलोमीटर नीचे हैं।
कुछ लोग कर गए पलायन
टिहरी लोकसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत द्वारा पहुंचने से पहले मिला था बिनियाल मजरा। यहां करीब दस घरों में से तीन घर खाली पड़े हैं।
खंडहर हो रहे इन घरों की फोटो खींच रहे थे तो एक महिला ने अपने छत से कहा कि क्या करोगे? यहां कोई नहीं रहता। पूछने पर पता चला कि सभी पलायन कर गए हैं।
सड़क है लेकिन पैदल चलना मजबूरी
द्वारा ग्राम पंचायत को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत रायपुर से जोड़ दिया गया है। मजरे भी तंग सड़कों से जुड़ गए हैं, लेकिन पगडंडियों पर पैदल चलना लोगों की मजबूरी है।
मालदेवता तक ही टाटा मैजिक आती हैं। यहां से ऊपर की चढ़ाई पैदल पूरी होती है। लोग बताते हैं कि शहर के लिए सुबह तो गाड़ियां मिल जाती हैं, लेकिन 10 बजे के बाद कोई साधन नहीं है। शाम को 5 बजे के बाद रायपुर से कोई वाहन नहीं मिलता।
12 कोस में फैली ग्राम पंचायत द्वारा
द्वारा ग्राम पंचायत करीब 12 कोस में फैली है। तीन ओर से सौंग नदी से घिरी है। गांव पहाड़ के दोनों ओर बसा है, इसलिए इसका नाम दोहरा यानी द्वारा पड़ गया।
गांव में सात या 11 साल में भैंसें को लेकर 12 कोस की परिक्रमा की जाती है। द्वारा गांव के देवधार पहाड़ी पर गुरु द्रोण की तपस्थली पर बना आश्रम बनने के बाद से ही बंद है।
वर्ष 2009 में आए अंतिम सांसद
गांव वालों ने बताया कि द्वारा ग्राम पंचायत में वर्ष 2009 में आखिरी बार सांसद विजय बहुगुणा जीतने के बाद आए थे।
इससे पहले 1988-89 में केंद्रीय मंत्री ब्रह्मदत्त और 1994 में विधान परिषद के सदस्य रहते हुए नित्यानंद स्वामी आए थे। आज तक यहां किसी भी मुख्यमंत्री ने कदम नहीं रखा है।
रायपुर से लाना पड़ता है सिलेंडर
गांव वालों ने बताया कि हमें गैस का सिलेंडर मालदेवता से लाना पड़ता है। वहां मिल गया तो ठीक नहीं तो रायपुर से ही सिलेंडर लाना पड़ता है। लोगों का कहना था कि गांव पहुंचते पहुंचते गैस की कीमत 600-700 रुपये हो जाती है।
10.15 बजे बंद मिला स्कूल
प्राथमिक विद्यालय समोली सुबह 10.15 बजे बंद मिला। बच्चे गांव के रास्तों पर खेलते दिखाई दिए। वहीं, प्राथमिक विद्यालय द्वारा में सुबह 11.15 बजे एक टीचर दिखे।
वह भी ऑफिस के कार्यों में व्यस्त थी और बच्चे कमरों में खेलने में। पूछने पर पता चला कि दूसरी मैडम मीटिंग में गई हैं। स्कूल में बच्चों को प्रधानमंत्री का नाम तो पता था, लेकिन ग्राम प्रधान का नहीं।
एक एएनएम सेंटर, वह भी बंद
ग्राम पंचायत में स्वास्थ्य की सुविधा नदारद है। बीमार होने पर रायपुर स्थित अस्पताल ही जाना पड़ता है। रायपुर अस्पताल पहुंचने के लिए एक से 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
तंग पगडंडी में एंबुलेंस नहीं आती, लेकिन मुख्य सड़क पर आ जाती है। गांव में बना एकमात्र एएनएम सेंटर बुधवार को बंद मिला। इस संबंध में किसी को जानकारी नहीं थी।
ग्राम सभा द्वारा
मजरे- द्वारा, बिजोली, मालूबंग, टिक्कर, समोली, बनगांव, कुंड, बगर, बोसी, ज्योलियो, कांडा, मवाली, सोड़ा द्वारा, बुलरी, मोलग्यान, बिनियाल, भैंसवाड़, तुनखेत, कनारु काटल, ठिक्कर, हरलीधार, बंदरवाला, कांवलीखेत।
ऊंचाई- करीब साढ़े 3 हजार फीट
लोकसभा क्षेत्र- टिहरी
विधानसभा क्षेत्र- रायपुर
जनसंख्या- करीब 2000
वोटर- करीब 1300
प्राइमरी स्कूल- 4
हाईस्कूल-1
आंगनबाड़ी केंद्र-5,
मिनी केंद्र-1
जीवन यापन- कृषि और मजदूरी
खेती- अदरक, बीन, मिर्च, खीरा आदि नगदी फसलें