राष्ट्रीय पक्षी के चयन में मोर के प्रतिस्पर्धी रहे विलुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी की आबादी फिर बढ़ेगी।
केंद्र सरकार ने भारतीय वन्य जीव संस्थान को इस पक्षी की ब्रीडिंग कराने की जिम्मेदारी दी है। राजस्थान के डिजर्ट नेशनल पार्क में संस्थान के विज्ञानी इस पक्षी की ब्रीडिंग कराएंगे। कभी यूपी, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के घास के मैदान इस पक्षी से गुलजार रहते थे, लेकिन वन्य जीव संस्थान के ताजा शोध में खुलासा हुआ है कि देश भर में अब सिर्फ डेढ़-दो सौ ही ग्रेट इंडियन बस्टर्ड बचे हैं।
अवैध शिकार, घास के मैदानों के खत्म होने से इसके वास स्थल खत्म हो गए हैं। अब केंद्र सरकार के आदेश के बाद शेड्यूल-1 के मुख्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की ब्रीडिंग के संबंध में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। ब्रीडिंग कराकर पक्षियों को झाड़ियों वाले घास के मैदानों में छोड़ा जाएगा।
घास के मैदानों में पाया जाने वाला यह सबसे बड़ा पक्षी है। नर पक्षी की ऊंचाई एक मीटर होती है। इस पक्षी के संबंध में वर्ष 2011 में जब रिपोर्ट आई तो पता चला कि इनकी 90 फीसदी आबादी खत्म हो चुकी है।
सोन चिरैया भी कहते हैं इसे
भारतीय वन्य जीव संस्थान के वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ डा. बिलाल हबीब ने बताया कि यह पक्षी एक साल में सिर्फ एक अंडा देता है। यह 18 से 20 साल जीता है। शोध के दौरान उन्होंने एक पक्षी में चिप लगाई जिससे पता चला कि 9 महीने में वह 7774 वर्ग किमी में घूमा और छह स्थानों पर रुका। कई स्थानों पर इसे सोन चिरैया भी कहते हैं।
इसलिए नहीं हुआ राष्ट्रीय पक्षी के लिए चयन
विज्ञानियों का कहना है कि ग्रेड इंडियन बस्टर्ड का नाम राष्ट्रीय पक्षी के लिए मोर के साथ प्रस्तावित था, लेकिन प्रख्यात पक्षी विशेषज्ञ सालिम अली की पैरवी के बावजूद चयनकर्ताओं ने सिर्फ इस अंदेशे से इसे खारिज कर दिया कि लोग बस्टर्ड का कहीं गलत उच्चारण न कर दें।
घास के मैदानों में कमी, पक्षियों के शिकार आदि कारणों से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड विलुप्तप्राय हो गया। इसकी कंजर्वेशन ब्रीडिंग कराई जाएगी। राजस्थान के डिजर्ट नेशनल पार्क में इसका सेंटर है।
- डॉ. जीएस रावत, डीन, भारतीय वन्य जीव संस्थान
दून घाटी में बढ़ी चिड़ियों की 30 प्रजातियां
दून घाटी में पक्षियों की 30 प्रजातियां बढ़ गई हैं। दून वैली स्प्रिंग बर्ड फेस्टिवल के मद्देनजर शनिवार को आयोजित नेचर वॉक पर निकले लोग और छात्र-छात्राएं इन रंग-बिरंगी चिड़ियों को देखकर खुश हो गए। छात्रों ने चिड़ियों की फोटो खींची और सोशल साइट्स पर डालकर अपने दोस्तों को भी दिखाई।
शनिवार को आसन के अलावा थानों, राजपुर गांव और वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में भी नेचर वॉक और हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। इस दौरान वेस्ट वॉरियर के सदस्य पॉलीथिन, पैकेट उठाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश देते रहे। टोंस वैली ट्रेल में सौ लोगों ने रंग-बिरंगे पक्षियों को देखा और प्रकृति की नजारे का आनंद लिया।
इसके साथ ही बोटेनिकल गार्डन के कैंपस में भी नेचर वॉक किया। इस दौरान पक्षी विशेषज्ञ, तितली विशेषज्ञ आदि लोगों के साथ रहे। वे लोगों को पक्षियों और पेड़-पौधों के संबंध में जानकारी देते रहे। नेचर वॉक में ब्लाइंड स्कूल के बच्चे भी रहे। इस मौके पर लोगों और छात्र-छात्राओं ने ब्राउन फिश आउल, ब्लैक बर्ड, हैरन, फाल्कन आदि पक्षी देखे। नेचर वॉक के दौरान छात्र-छात्राओं को रुद्राक्ष, भोज पत्र, रेनबो यूके लिप्टस, हरड़, बहेड़ा, काला बांस आदि के पेड़ दिखाए गए।
मुख्य वन संरक्षक (इको टूरिज्म) डॉ. कपिल जोशी ने बताया कि बारिश के वक्त लोगों ने छाते लगाकर थानों में बर्ड वॉचिंग की। उन्होंने बताया कि आसन और अन्य क्षेत्रों में वर्ष 2003 में हुई गणना में 26 प्रजाति के 3700 पक्षी मिले थे। इस वर्ष 56 प्रजाति के 5600 पक्षी मिले हैं। डॉ. जोशी ने बताया कि संरक्षण और सुरक्षा बढ़ा दिए जाने से घाटी में पक्षियों की संख्या बढ़ी है।