डॉक्टर बनने में लड़कियों की दिलचस्पी ज्यादा है। सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) की ओर से आयोजित कराए गए एआईपीएमटी (आल इंडिया प्री मेडिकल प्री डेंटल टेस्ट) का आंकड़ा देखें तो हर साल लड़कियों की संख्या ज्यादा होती है। जबकि लड़कों का रुझान ज्यादा आईआईटी में एंट्री पर बना हुआ है।
सीबीएसई के एआईपीएमटी 2014 कुल छह लाख 16 हजार 982 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए थे। इसमें से पांच लाख 79 हजार 707 अभ्यर्थी परीक्षा के योग्य निकले। इनमें से पांच लाख 23 हजार 701 ने एआईपीएमटी 2014 में हिस्सा लिया।
योग्य अभ्यर्थियों में से दो लाख 58 हजार 282 पुरुष और तीन लाख 21 हजार 322 अभ्यर्थी महिलाएं थी। एआईपीएमटी 2015 री-टेस्ट में कुल चार लाख 22 हजार 859 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से तीन लाख 74 हजार 386 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
इनमें एक लाख 80 हजार 957 पुरुष अभ्यर्थी और एक लाख 93 हजार 429 महिला अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें करीब 18 हजार ने क्वालिफाई किया, जिसमें करीब 53 प्रतिशत पुरुष और करीब 47 प्रतिशत महिला अभ्यर्थी थीं।
एआईपीएमटी 2014 में भी 18 हजार 115 अभ्यर्थियों में 9716 पुरुष और 8399 महिला अभ्यर्थी कामयाब हुईं थी। आंकड़ों से एक बात और सामने आ रही है कि छात्राएं ज्यादा आवेदन तो करती हैं, लेकिन कामयाबी के नजरिये से लड़के आगे हैं।
इस साल एआईपीएमटी की आवेदन प्रक्रिया बुधवार को खत्म हो गई। परीक्षा विशेषज्ञ विपिन बलूनी ने बताया कि कोचिंग के लिहाज से भी मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी करने वालों में छात्राएं ज्यादा हैं। उत्तराखंड से भी एमबीबीएस में जाने वाली लड़कियों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है।