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मुंशी प्रेमचंद्र की रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद होता तो उन्हें नोबेल मिल जाता- राज्यपाल

Sat, 18 Nov 2017 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल ‘वैली आफ वर्ड्स’ का शुक्रवार से आगाज हो गया। पहले दिन साहित्य, सरोकार, जीवन प्रबंधन, रोजगार, पहाड़, पर्यावरण और कूटनीति पर सत्रों का आयोजन और लेखन पर सार्थक विमर्श हुआ।
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फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल डॉ. केके पाल ने हिंदी और क्षेत्रीय साहित्य की अंग्रेजी में अनुवाद की जरूरत बताई और नई पीढ़ी में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए साहित्य को रोचक बनाने का सुझाव दिया।

दि शिवालिक हिल्स फाउंडेशन ट्रस्ट के बैनर तले तीन दिवसीय इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल ‘वैली आफ वर्ड्स’ की राजपुर रोड स्थित मधुबन होटल में शुरुआत हुई। फेस्टिवल में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
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कार्यक्रम के पहले दिन यहां ओएनजीसी लॉन में आयोजित उद्घाटन सत्र में राज्यपाल ने बताया कि उत्तराखंड महान हिंदी कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्म स्थली है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘गीतांजलि’ की रचना कुमाऊं की पहाड़ियों में ही शुरू की थी। इंग्लैंड जाते वक्त जहाज में उन्होंने गीतांजलि के कुछ हिस्से को बंगला से अंग्रेजी में अनुवाद कर दिया, जिसे उनके मित्र जीएच हार्डी ने प्रकाशित कराया।
 
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हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषा ही हैं जरूरी

International Literature and Art Festival
अगले वर्ष टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला। अगर मुंशी प्रेमचंद्र की रचनाओं का तब अंग्रेजी में अनुवाद होता तो उन्हें नोबेल मिल जाता। पूरी दुनिया उनके साहित्य से परिचित होती। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना है तो इसे रोचक बनाना होगा।

इंटरनेट पर बहुत सी पुस्तकें पीडीएफ  व अन्य फारमेट में उपलब्ध हैं परंतु जो प्रामाणिकता, ज्ञान, दर्शन, विचार, तर्क, सृजनात्मकता किताबों में मिल सकती है वो इंटरनेट पर संभव नहीं है।

कविताओं, फिल्मों में कृत्रिमता सी आ रही है। गालिब के डेढ़ सौ साल पहले लिखे शेर ‘दिल ढूंढता है फि र वही फु र्सत के रात दिन’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह संक्रमण काल है। समाज भौतिकतावादी व मशीनी हो रहा है, ऐसे में कला और साहित्य की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस मौके पर मैनेजमेंट गुरुचरण दास ने ‘मिडिल ऐज प्लानिंग’ समय प्रबंधन और जीवन को सहजता से लेने की सीख दी। इस मौके पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार, एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरपर्सन डॉ. बलदेव भाई, रोबिन गुप्ता ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन ऑनरेरी एडवाइजर नवीन चोपड़ा ने किया।
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