केदारघाटी की आपदा में अपनों को खोने वाले कम नहीं थे। इनमें से कई ने अपनों को अपने आगे जिंदगी खोते देखा। उन्होंने क्लेम के लिए उनका नाम सूची में तो दर्ज करा दिया, लेकिन अभी वह उनकी मौत का सुबूत नहीं दे पाए हैं।
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ऐसे 159 नाम लापता की सूची में दर्ज हैं। यह नाम भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के गोपेश्वर, उत्तरकाशी, टिहरी और श्रीनगर कार्यालय से सूची में दर्ज कराए गए। इनमें अकेले श्रीनगर से 33 हैं।
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तकरीबन सौ नाम इनमें ऐसे हैं, जो एलआईसी के एजेंट्स के मार्फत उनके मिसिंग ग्राहकों की जानकारी हासिल कर सूची में जोड़े गए। केवल नौ आपदा मृतकों के उत्तराधिकारी ही उनका डेथ सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर पाए, लिहाजा क्लेम केवल उन्हें ही दिया जा सका है।
मांगी जा रही जानकारी
आपदा मृतकों के क्लेम के संबंध में हर रोज मंडलीय कार्यालय में तकरीबन दो दर्जन फोन पहुंच रहे हैं। यह फोन निगम के दिल्ली और बनारस कार्यालय से सर्वाधिक हैं। दरअसल, वह क्लेम राशि को लेकर मुख्य कार्यालयों केचक्कर काट रहे हैं, जहां से उन्हें दून स्थित मंडल कार्यालय को रेफर किया जा रहा है।
जल्द ही एक और कैंप लगाया जाएगा
ऊखीमठ और रूद्रप्रयाग में हमने हाल ही में कैंप लगाया था, उसमें भी कई लोग क्लेम के लिए पहुंचे। चेयरमैन एसके राय की तरफ से भी इस संबंध में तेजी दिखाने के निर्देश दिए गए हैं।
क्लेम डिपार्टमेंट की तरफ से जल्द ही एक और कैंप इन क्षेत्रों में लगाया जाएगा। एक लाख तक का क्लेम बगैर बांड भी दिया जा रहा है। 10 लाख तक का क्लेम भी अगर मैच्योर नहीं हो पाया है तो उसे पालिसी बांड दिखाकर दे दिया जाएगा।
-प्रतिभा व्यास, क्लेम मैनेजर, एलआईसी
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लापता होने की पुलिस एफआईआर
पालिसी बांड की कापी
डेथ सर्टिफिकेट
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