फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर ‘कट’ के साथ कट जाती है आपकी जेब

Wed, 04 Sep 2013 11:28 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
जिस तेजी से पेट्रोल-डीजल की कीमतें चढ़ रही हैं, उसी रफ्तार से घटतौली बढ़ रही है। हर ‘कट’ के साथ उपभोक्ता की जेब कट रही है।
विज्ञापन


उत्तराखंड में उपभोक्ताओं के साथ घटतौली न हो और उन्हें शुद्ध पेट्रोल मिले इसके लिए प्रशासन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं कर पाया है। ऐसा नहीं कि उसे घटतौली की शिकायतें नहीं मिली। लेकिन जब भी निरीक्षकों की जांच को पहुंची तो पेट्रोल पंप वाले उनकी आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहे।

पढ़ें, रुपए की जबरदस्त गिरावट से कारोबार पड़ा ठंडा

आलम क्या है, यह इसी से समझा जा सकता है कि खाद्य आपूर्ति और बाट-माप विभाग ने अभी तक एक भी पेट्रोल पंप के खिलाफ घटतौली और मिलावट को लेकर कार्रवाई नहीं की। अलबत्ता अब डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम जरूर अभियान चलाकर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन


यूं होती है घटतौली
भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के विज्ञानी डा. एसके शर्मा का कहना है कि नोजल के कट करने पर जितना भी तेल पाइप में होता है वह वापस टंकी में चला जाता है। इस दौरान मीटर चालू रहता है। लेकिन कट के बाद जब दुबारा पाइप भरता है उस दौरान मीटर तो चलता रहता है लेकिन पेट्रोल टंकी में नहीं जाता है।

पढ़ें, जरूरत की चीजों पर चला डॉलर का चाबुक

जब नोजल को मशीन पर टांग दिया जाता है तो मीटर शून्य दिखाता है। जब मशीन चालू होती है तो पाइप भरने के दौरान मीटर चलने लगता है लेकिन वाहन की टंकी में पेट्रोल नहीं आता।

पाइप में जितनी मात्रा में तेल भरता है उतना उपभोक्ता का नुकसान हो जाता है। इसके बाद पेट्रोल पंप का सेल्समैन जितनी बार नोजल कट-कट करेगा उतना तेल कम हो जाता जाएगा।

ऐसे बचें
उपभोक्ताओं को लगातार पेट्रोल या डीजल दिया जाए। बार-बार मीटर शून्य पर न किया जाए।
पेट्रोप पंप के सेल्समैन पर निगाह रखें नोजल को बार-बार कट न करने दें।

बस दो बार हुए पेट्रोल पंप सीज
2008-09 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट ने सेंट जोजेफ्स के सामने स्थित पेट्रोल पंप पर छापा मारकर घटतौली पकड़ी और पंप को सीज कर दिया था।

2006 में तत्कालीन जिलाधिकारी पुनीत कंसल के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट धीरज गर्ब्याल ने प्रिंस चौक के पास पेट्रोल पंप पर छापा मारकर गड़बड़ी पकड़ी थी। पेट्रोल पंप को सीज कर दिया गया।

ऐसे करें मिलावट की जांच
पंप संचालक अमरजीत सेठी ने बताया कि तेल में मिलावट की जांच फिल्टर पेपर से आसानी से हो सकती है। आईओसी के पंपों में कंपनी का ही फिल्टर पेपर मिलता है। पेपर पर पेट्रोल की एक बूंद डालने पर यह आधे मिनट में उड़ जाता है।

इसके बाद पेपर में कोई स्पॉट रह जाए तो मिलावट की संभावना होती है। वहीं डेंसिटी टेस्ट भी किया जा सकता है। जिसमें वेरिएशन होने पर मिलावट का खतरा रहता है।

रंगों से भी हो सकती है पहचान
मार्केटिंग डिसीप्लिन गाइडलाइन के तहत तेल कंपनियों ने मिलावट रोकने के लिए पेट्रोल, डीजल और केरोसिन को अलग-अलग रंग दिया है। पेट्रोल का रंग सुनहरा भूरा है, जबकि केरोसिन का नीला। डीजल पानी की तरह बेरंग दिखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तीनों में मिलावट हो तो उनका रंग बदल जाता है।

पंपों पर नहीं सील की व्यवस्था
डिपो से पंप तक तेल पहुंचाने में तो तेल कंपनी सतर्कता बरतती है, लेकिन पंप पर तेल उतरने के बाद अंडर ग्राउंड टैंकों को सील करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे बरसात में पेट्रोल-डीजल में पानी मिलने की शिकायत अकसर आती है।
विज्ञापन


मारे जाते हैं औचक छापे
पंपों पर मिलावट की जांच के लिए गठित पेट्रोलियम मंत्रालय की एक टीम साल में एक बार पंपों में तेल का सैंपल लेकर लैब में भेजती है। मिलावट अवरोधक टीम अलग है। यह घुमंतू छापामार टीम है। इस टीम की गाड़ी में तेल की जांच करने वाली लैब होती है। यह टीम कभी भी किसी भी शहर में जाकर पंप की जांच कर सकती है।

उपभोक्ता कृपया ध्यान दें
हर पेट्रोल पंप पर एक बोर्ड लगा होता है। इस पर पेट्रोल पंप संचालक, लोकल सेल्स अफसर के नंबर होते हैं। किसी भी गड़बड़ी की शिकायत इन पर की जा सकती है।

ऐसे बचाएं तेल
रेड सिग्नल हो तो गाड़ी बंद कर लें
जाम लंबा हो तो गाड़ी बंद कर लें
वाहन की सर्विसिंग कराते रहें
बाइक का तेल बंद करके खड़ी करें
तिरछी बाइक खड़ी करने से ओवरफ्लो हो सकता है, सीधी खड़ी करें

फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें