आपदा के समय भी उत्तराखंड सरकार को जनता की कम और एविएशन कंपनियों के भुगतान की ज्यादा चिंता रही।
जितनी जल्दबाजी 25 करोड़ के भुगतान में दिखाई यदि इतनी पीड़ितों व उनके परिवारों को मुआवजा देने में दिखाई होती तो शायद कुछ इज्जत बच जाती।
कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश
तमाम आरोप लगने के बजाय प्राईवेट सिविल एविएशन कंपनी को भुगतान कर दिया गया। यात्रियों से मोटी रकम वसूली के एक मामले में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को पत्र भेजकर ऐसी कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश भी की थी।
लेकिन अब कार्रवाई के बजाय उन्हें दिया पैसा एडजस्ट करने के लिए शपथपत्र मांगा जा रहा है कि उन्होंने निकाले यात्रियों से किराया वसूली तो नहीं की है। मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से विमानन कंपनियों को सरकार ने तुरंत भुगतान कर दिया है।
लेकिन अब यह राशि केंद्र से लेने का प्रस्ताव इस बात पर अटक गया है कि राज्य सरकार कंपनियों से यह शपथ पत्र लेकर दे कि कहीं यात्रियों से किराया की वसूली तो नहीं की गई। आपदा के दौरान प्राइवेट कंपनियों के हेलीकाप्टरों संचालन पर पक्ष विपक्ष के कई राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप लगते रहे।
भुगतान में जरा भी देरी नहीं
निजी हेलीकॉप्टर सेवा लगातार निशाने पर रही, लेकिन राज्य सरकार ने उनके भुगतान में जरा भी देरी नहीं दिखाई। एक विमान कंपनी पर तीन लाख रुपए लेकर यात्री को निकालने का खुलासा भी आपदा के दौरान हुआ था।
जिसपर केंद्र ने राज्य सरकार को सभी कंपनियों की कार्यप्रणाली पर निगाह रखने के निर्देश दिए थे। सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर सेवा के 673 करोड़ के बिल को केंद्र से मिले विशेष पैकेज के साथ सरकार ने अपने खाते से निजी कंपनियों को सरकार भुगतान कर अब फंस गई है।
अब सरकार भुगतान कर चुकी कंपनियों से प्रमाण पत्र लेगी कि उन्होंने यात्रियों से कोई भुगतान नहीं लिया, जिसके बाद ही प्राइवेट हेलीकॉप्टरों की भुगतान राशि जारी होगी।