देश के किसी भी राज्य में बनने वाले मोबाइल एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर को अब दूसरे राज्य भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे सरकार के पैसों की बचत होगी। यह आईटी मंत्रालय के ओपन फोर्ज प्लेटफार्म से संभव हो सकेगा। बृहस्पतिवार को मंत्रालय के इस ओपन फोर्ज प्लेटफॉर्म की जागरूकता के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में इसकी जानकारी दी गई।
आईटीडीए में कार्यशाला का शुभारंभ निदेशक अमित कुमार सिन्हा ने किया। इस कार्यशाला में प्रदेश के करीब 37 विभागों के 90 से ज्यादा आईटी से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। ओपन फोर्ज के वरिष्ठ सलाहकार अजय अग्रवाल ने बताया कि सरकारी विभाग और एजेंसियां जो एप्लीकेशन विकसित करते हैं, वह इस प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित कर सकते हैं। यह एक तरह से गूगल ड्राईव की तरह का प्लेटफॉर्म है। इससे किसी भी अन्य राज्य को नया एप्लीकेशन बनाने की जरूरत नहीं होगी।
वह इस प्लेटफॉर्म से एप्लीकेशन को लेकर अपने राज्य में संचालित कर सकते हैं। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर करीब 1700 एप्लीकेशन उपलब्ध हो चुके हैं। उत्तराखंड पुलिस, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों की ओर से तैयार सॉफ्टवेयर व एप्लीकेशन इस मंच पर साझा किए जा सकते हैं। कार्यशाला में सभी विभागों के अधिकारियों को ओपन फोर्ज प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। कार्यशाला का समापन शुक्रवार को होगा।
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ऐसे बचेगा सरकारों का पैसा
अगर दून पुलिस ने लोगों की मदद के लिए पैसा खर्च करके कोई एप्लीकेशन तैयार करवाया है तो उसे दिल्ली या केरल की पुलिस भी इस्तेमाल कर सकेगी। इससे उस राज्य की पुलिस को अलग से एप्लीकेशन तैयार कराने के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। इसी तरह उत्तराखंड के सरकारी विभाग भी अन्य राज्यों के एप्लीकेशन को ओपन फोर्ज से लेकर काम में ला सकते हैं।