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ऑर्डर-ऑर्डर...पैरवी तो ढंग से करो सरकार!

Sat, 05 Oct 2013 09:36 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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पिछले दिनों उच्च न्यायालय में तीन मामलों में सरकार को तगड़ा झटका लगा। सरकार के नुमाइंदे अपने शासनादेश और एक्ट को ही न्यायालय में नहीं बचा सके।
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इसे लेकर खासतौर पर आंदोलनकारियों में काफी रोष है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह उच्च न्यायालय में यह सरकारी नुमाइंदों की कमजोर पैरवी का नतीजा है।

उच्च न्यायालय ने पलटा फैसला
आंदोलनकारियों को सरकारी नौकिरयों में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का फैसला पिछले दिनों उच्च न्यायालय ने पलट दिया। इसका शासनादेश भी हो चुका था लेकिन न्यायालय में चुनौती मिली। इसलिए सरकार के आदेश पर रोक लगा दी गई।

इस व्यवस्था केतहत कुछ नौकरियों में आंदोलनकारियों को आरक्षण का लाभ भी मिल चुका है लेकिन सभी के नतीजों पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।

उच्च न्यायालय ने लगाई रोक
खंडूड़ी सरकार में खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय हुआ विधानसभा से एक्ट पास कराया गया। अन्य प्रदेशों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए यह व्यवस्था पहले से ही है। लेकिन उत्तराखंड में यह पहली बार हुआ। लेकिन उच्च न्यायालय ने इस पर भी रोक लगा दी।
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अब जो नई भर्ती के विज्ञापनों में आंदोलनकारियों व खिलाड़ियों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है। तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा लोक सेवा आयोग के अंतर्गत आने वाले पदों पर होने वाली भर्ती में राज्य के युवाओं की उम्र सीमा सामान्य श्रेणी के लिए 35 से 40 वर्ष करने का फैसला लिया गया।

आंदोलनकारी परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान कई बार इस मांग को लेकर सीएम से मिले। अंतत: आदेश हुआ लेकिन उच्च न्यायालय में नहीं ठहर सका।
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