‘इंसाफ’ की लड़ाई लड़ने के लिए ‘योद्धा’ तैयार करने वाले संस्थान के साथ 11 वर्षों से नाइंसाफी हो रही है और सब मौन हैं।
वे भी जो यहां ‘योद्धा’ बनने के लिए आते हैं और वे भी जो ‘योद्धा’ बनाने के लिए यहां बैठे हैं। जी हां, बात हो रही है उत्तराखंड के इकलौते सरकारी लॉ कॉलेज, गोपेश्वर की।
2003 में स्थापित इस लॉ कॉलेज की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्थापना के बाद से यह कॉलेज सिर्फ एक स्थायी प्रवक्ता के भरोसे चल रहा था।
हालांकि इसी माह इस कॉलेज को दो प्रवक्ता मिले हैं। बावजूद, कानून की अच्छी तालीम लेने की चाहत लिए आने वाले छात्र-छात्राओं को यहां वो सुविधाएं नहीं मिल पातीं जो लॉ कालेज के विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए।
राज्य गठन से पूर्व गढ़वाल और कुमाऊं में कोई सरकारी लॉ कॉलेज नहीं था। अलबत्ता पीजी कॉलेज गोपेश्वर में 1980 से लॉ एक फैकल्टी के रुप में जरूर संचालित हो रहा था।
उत्तराखंड का इकालौता लॉ कॉलेज
यहां की कुछ उपलब्धियां भी हैं। मसलन 1987 में पास आउट हुए रविंद्र मैठाणी वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में डिप्टी रजिस्ट्रार हैं। यहीं के छात्र नंदन सिंह राणा टिहरी जिले में सीजेएम हैं। मदन राम भी न्यायिक मजिस्ट्रेट हरिद्वार हैं।
डिप्टी स्पीकर डॉ. अनुसूया प्रसाद मैखुरी और बीसूका (बीस सूत्रीय कार्यक्रम) उपाध्यक्ष राजेंद्र भंडारी ने भी यहीं से कानून की डिग्री ली है। राज्य गठन के बाद लॉ फैकल्टी की उपलब्धि को देखते हुए राज्य सरकार ने 2003 में लॉ कॉलेज, गोपेश्वर की स्थापना की।
यह प्रदेश का इकलौता लॉ कॉलेज है। महाविद्यालय में प्राचार्य समेत 8 प्रवक्ता, 1 पुस्तकालयाध्यक्ष, 2 लिपिक और 4 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों का सृजन किया गया। लेकिन स्थापना काल से ही इसे कोई प्राचार्य नहीं मिला।
यही नहीं छह प्रवक्ता और एक लिपिक और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पद भी स्थापना काल से ही रिक्त है। प्रभारी प्राचार्य के रूप में यहां का कार्यभार डॉ. पीएस मखलोगा पीजी कॉलेज गोपेश्वर के पास है।
एक स्थायी प्रवक्ता और दो संविदा प्रवक्ता के भरोसे 11 वर्ष से पठन-पाठन कार्य चल रहा है, वहीं एक लिपिक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे कॉलेज की पूरी व्यवस्था है।
हालांकि काफी मशक्कत के बाद इस माह इस कॉलेज को दो स्थायी प्रवक्ता मिले हैं। वर्तमान में कॉलेज में 80 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिनमें प्रथम वर्ष में 45, द्वितीय वर्ष में 26 और तृतीय वर्ष में 9 छात्र हैं।
तब टीन शेड में चलता था कॉलेज
2003 में स्थापित होने के बावजूद लॉ कॉलेज को 2012 में अपना भवन मिला। इससे पहले पीजी कॉलेज के टीन शेड में ही कॉलेज संचालित हो रहा था। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने कॉलेज के नए भवन का लोकार्पण किया था।
वर्तमान में यहां प्रशासनिक और अकादमिक भवन और लाइब्रेरी पूर्ण रूप से संचालित हो रहे हैं। जबकि शिक्षक आवासीय भवन और कंप्यूटर लैब का निर्माण चल रहा है। लॉ कॉलेज का अपना खेल मैदान नहीं है। वहीं यहां के छात्र प्रायोगिक प्रशिक्षण लेने के लिए जिला न्यायालय में जाते हैं।
कॉलेज की मान्यता
लॉ कॉलेज गोपेश्वर को केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल मान्यता है। वहीं बार काउंसिल ऑफ इंडिया नई दिल्ली से भी कोर्स संचालन के लिए अनुमोदन लिया गया था।
कानून की पढ़ाई से कोई नाता नहीं
लॉ कॉलेज का जिम्मा संभाले पीजी कॉलेज गोपेश्वर के प्राचार्य पीएस मखलोगा का कानून की पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। बावजूद वे लॉ कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य का जिम्मा संभाले हैं।
प्रवक्ताओं की कमी को दूर करने का प्रयास हो रहा है। हाल ही में दो प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई है। केंद्रीय गढ़वाल विवि से कॉलेज को स्थायी मान्यता दिलाने के लिए बात हो रही है। प्रवक्ता मिल जाते हैं तो शीघ्र ही यहां एलएलएम भी शुरू कर दिया जाएगा।
- जगदीश प्रसाद, उच्च शिक्षा निदेशक, हल्द्वानी