उन्हें यह लाभ पदोन्नति की तिथि से प्रतीकात्मक (नोशनली) और शासनादेश जारी होने की तिथि से वास्तविक रूप में प्राप्त होगा। इस बारे में तय अवधि के बीच ऐसे पदोन्नत कर्मचारी जो सेवानिवृृत्त हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, को भी उन्हें पेंशन में और पारिवारिक पेंशन में फायदा मिलेगा।
लेकिन ये फायदा उन्हें ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण व राशिकरण के पुनर्निर्धारण के लिए नहीं मिलेगा। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किया। छठा वेतनमान लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नत कर्मचारियों के ग्रेड पे के निर्धारण की अलग-अलग व्यवस्था थी।
पदोन्नत कर्मचारियों को फिटमेंट तालिका के तहत तय लाभ सिर्फ एक बार ही मिल सकता था। यानी जब वे पदोन्नत हुए तो उन्हें फिटमेंट तालिका का लाभ नहीं मिला। इस कारण वरिष्ठ पद पर पदोन्नत होने के बावजूद उनका वेतन सीधी भर्ती वाले कर्मचारियों से कम निर्धारित हुआ।
लेकिन ये विसंगति सातवां वेतनमान लागू होने से पूर्व की है। सातवें वेतन आयोग ने ग्रेड वेतन की व्यवस्था को बदलकर कई स्तर बनाए हैं, जिससे वेतन विसंगति का पेच कुछ हद तक खत्म हो गया है।
उत्तराखंड कर्मचारी, शिक्षक आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा ने पदोन्नत कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने पर प्रदेश सरकार का आभार प्रकट किया है। मोर्चा के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अरुण शर्मा और अन्य मोर्चा नेताओं ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों पर भी कार्रवाई करें।