विजिलेंस जांच में आया था कि छात्र-छात्राओं को बिना प्रवेश दिलाए उन्हें पात्र दर्शाकर छात्रवृत्ति वसूली जा रही थी। जांच में इन जालसाजों की गाजियाबाद के एक बैंक में साठगांठ पाई गई थी। विजिलेंस की तरफ से हल्द्वानी और उत्तरकाशी में छात्रवृत्ति घोटाले के दो मुकदमे दर्ज कराए थे।
विजिलेंस ने विश्वविद्यालय के चेयरमैन अशोक कुमार गोदिया समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में उत्तरकाशी समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी समेत कर्मचारियों की साठगांठ भी उजागर हुई थी।
विजिलेंस के तत्कालीन डायरेक्टर अशोक कुमार ने 15 राज्यों के आला अफसरों को पत्र लिखकर छात्रवृत्ति में घोटाले की आशंका जताई थी। साथ ही शासन के आला अफसरों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की छात्रवृत्ति हड़पने के पूरे खेल से अवगत कराया गया था। इसके बाद भी शासन की निंद्रा नहीं टूटी।
नतीजा यह हुआ कि विजिलेंस के अलर्ट के दो साल बाद छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को एसआईटी गठित की गई। यदि उस समय घोटाले को लेकर जारी हुए अलर्ट को गंभीरता से लेकर जांच कराई जाती तो घोटालेबाजों के चेहरे पहले ही बेनकाब हो गए होते। चलो देर से सही छात्रवृत्ति घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर अब कार्रवाई की गाज गिरनी शुरू हो गई है।