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छात्रवृत्ति घोटाला: विजिलेंस के अलर्ट पर भी नहीं टूटी थी सिस्टम की नींद, 15 राज्यों को भेजा था पत्र

Wed, 22 May 2019 08:17 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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घोटाला - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विजिलेंस के 2016 में छात्रवृत्ति घोटाले के अलर्ट पर सरकारी सिस्टम की नींद टूट जाती तो अब तक छात्रवृत्ति घोटाले के गुनहगार अपने कृत्यों की सजा भुगत रहे होते। विजिलेंस ने ही पहली बार मेवाड़ यूनिवर्सिटी का छात्रवृत्ति घोटाला पकड़ा था, जिसमें फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं का प्रवेश दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पी गई है।

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विजिलेंस के तत्कालीन डायरेक्टर अशोक कुमार ने 15 राज्यों के आला अफसरों को अलर्ट भेजकर छात्रवृत्ति में व्यापक स्तर पर घोटाले की आशंका जताई थी। प्रदेश में छात्रवृत्ति घोटाले का शोर तो 2013 के बाद से ही मचना शुरू हो गया था, लेकिन शासन ने उसे गंभीरता से नहीं लिया।

घोटाले संबंधी जितनी भी शिकायतें हुईं, उन्हें विभागीय अधिकारी जांच के नाम पर फाइलों में दफन करते गए। 2016 में विजिलेंस के डायरेक्टर अशोक कुमार ने नैनीताल और उत्तरकाशी में मेवाड़ विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा छात्र-छात्राओं की फर्जी सूची सौंपकर छात्रवृत्ति रकम हड़पने का खुलासा किया था।

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विजिलेंस जांच में आया था कि छात्र-छात्राओं को बिना प्रवेश दिलाए उन्हें पात्र दर्शाकर छात्रवृत्ति वसूली जा रही थी। जांच में इन जालसाजों की गाजियाबाद के एक बैंक में साठगांठ पाई गई थी। विजिलेंस की तरफ से हल्द्वानी और उत्तरकाशी में छात्रवृत्ति घोटाले के दो मुकदमे दर्ज कराए थे।

विजिलेंस ने विश्वविद्यालय के चेयरमैन अशोक कुमार गोदिया समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में उत्तरकाशी समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी समेत कर्मचारियों की साठगांठ भी उजागर हुई थी। 

विजिलेंस के तत्कालीन डायरेक्टर अशोक कुमार ने 15 राज्यों के आला अफसरों को पत्र लिखकर छात्रवृत्ति में घोटाले की आशंका जताई थी। साथ ही शासन के  आला अफसरों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की छात्रवृत्ति हड़पने के पूरे खेल से अवगत कराया गया था। इसके बाद भी शासन की निंद्रा नहीं टूटी।

नतीजा यह हुआ कि विजिलेंस के अलर्ट के दो साल बाद छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को एसआईटी गठित की गई। यदि उस समय घोटाले को लेकर जारी हुए अलर्ट को गंभीरता से लेकर जांच कराई जाती तो घोटालेबाजों के चेहरे पहले ही बेनकाब हो गए होते। चलो देर से सही छात्रवृत्ति घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर अब कार्रवाई की गाज गिरनी शुरू हो गई है।  
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