देहरादून में एक विभाग के साहब से आजकल सभी परेशान हैं। कर्मचारी भी और फरियादी भी।
क्या घर में कूड़ादान है?
कुछ भी काम लेकर आओ तो साहब एक ही बात करते हैं कि घर में कूड़ादान है। प्लास्टिक का क्यों उपयोग में लाते हो। जूट का क्यों उपयोग में नहीं लाते।
फाइलों को साइन कराने कर्मचारी जाता है तो उसे भी जूट का बैग कूड़ेदान के तौर पर खरीदने की नसीहत मिलती है। कोई फरियादी जाए तो उसकी मांग पूरी करने पर वचन लिया जाता है कि वह जूट का बेग उपयोग में लाएगा।
साहब का यह हाल देखकर पहले तो सभी दून वासी चकित और हैरान थे। सभी साहब कि तारीफ पर तारीफ किए नहीं थकते थे। लेकिन बाद में पता चला कि साहब के परिवार की एक एनजीओ है।
जो जूट के बैग बनाने का काम भी करती है। अब सब साहब से कन्नी काटने लगे हैं।