देहरादून जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी अपने साथी अफसरों और मातहतों से खफा हैं। बात-बात में कहते हैं कि यार नौकरी करके फंस गए। नौकरी के पहले मैंने ये किया, वो किया।
फलां नेता मेरे साथ का है, वह देखो मंत्री बन गया। उससे धाकड़ नेता रहा हूं मैं, वगैरह-वगैरह। कुछ देर चुप रहते हैं और कहते हैं कि सोचता हूं नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ जाऊं। फिर उनका चेहरा उतर जाता है, कहते हैं लेकिन अनाप-शनाप पैसा नहीं है।
कभी गलत काम किया ही नहीं जिससे खूब पैसा मिले। चाहता तो करोड़ों कमा लेता। इसके बाद दफ्तर के एक कोने की तरफ इशारा करके कहते हैं जानते हैं यहां विस्फोटक रखा है।
अगर खोल दूं न तो हड़कंप मच जाएगा। बड़े-बड़ों की चड्ढी उतर जाएगी। इतने बड़े घोटाले हैं इसमें कि आग लग जाए। फिर संवाददाता की तरफ इशारा करके कहते हैं कि रिटायरमेंट हो जाए फिर बड़ी-बड़ी खबरें बताऊंगा।