जल संस्थान में प्रदर्शन के दौरान एक ओर लोग बोल रहे थे कि घरों में पानी नहीं आ रहा है। वहीं अपने साथ घर से पानी भी लेकर आए थे।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अपना पानी पीने को निकाला तो कर्मचारी चुटकी लेने लगे और बोले कि अरे पानी के लिए तो प्रदर्शन करने आए हो और पानी भी अपना पी रहे हो। पानी लाने की क्या जरूरत थी हम दे देते, आप लोग अपना पानी बचाकर रखते।
इस बात पर सभी लोग हंसने लगे और फिर क्षेत्रवासी बोले जी हम तो अपना पानी लेकर चलते हैं, कहीं मिले तो ठीक ना मिले तो भी ठीक।
अब क्या कह सकते हैं
जल संस्थान में एक एई किसी पुराने अधिकारी के साथ बैठकर बाते कर रही थी। ये अधिकारी एई को समझा रहे थे कि आप लोग नए हो आपको साइट पर जाना चाहिए, ना कि ऑफिस में बैठना चाहिए।
तभी एक साइट से विजीट कर रहे ईई वहां आ गए। वह रिटायर्ड ईई को देख खुश हुए और बोले जी आप यहां आज कैसे? ईई बोले कि बच्चों को समझा रहा हूं साइट पर जाकर ही कुछ सीख पाओगे। यह सुनकर वह ईई भी बोले कि हां मैंने भी कहा कि एई को साइट पर जाकर सीखना चाहिए।
इस इतनी बात हुई कि एई गुस्से में चाय का कप छोड़कर वहां से चलती बनी और थोड़ी ही देर में अपनी साथी एई के साथ घर निकल गई। इस पर दोनों ईई एक-दूसरे का मुंह देखकर बोले कि आजकल किसी को सही राय देनी ही नहीं चाहिए। काम ना सीखकर अपना ही बुरा करेगी, हम तो सिर्फ सही दिशा दिखा सकते हैं।