साहब धरती पर भगवान का रूप कहे जाते हैं। मरीजों को नई जान देने में जी जा जो लगा देते हैं। जी हां, यहां बात हो रही डॉक्टर साहब लोगों की।
ट्रांसफर रोकने के लिए फिर रहे मारे-मारे
ये खुद के भगवान होने की बात को साबित करें न करें लेकिन एक बात तो साफ है कि पैसा ही इनके लिए भगवान हो गया है। पहले प्रमोशन के लिए परेशान थे। अब सरकार ने प्रमोशन किया तो ट्रांसफर रोकने के लिए मारे फिर रहे हैं।
सरकार भी पशोपेश में है। सरकार ने कहा कि प्रमोशन पाया है अब इस बहाने तो पहाड़ों में मरीजों की सेवा कर लो। पहाड़ों में डॉक्टर नहीं वहां पर आपकी जरूरत है। पर ये डॉक्टर साहब हैं कि पहाड़ जाने के नाम पर नौकरी छोड़ने तक को तैयार है।
अब भला सरकारी नौकरी से इतर ये डॉक्टर साहब जो प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं पहाड़ में इतना पैसा कहां से मिलने वाला है। दून में रहकर अगर नौकरी भी छोड़ दी तो कुछ फर्क नहीं अपनी दुकान जो पहले से चली आ रही है उसी को चला लेंगे। वरना पहाड़ गए तो आगे इस दुकान को कौन पूछेगा।