उत्तराखंड के आईपीएस कैडर में भी कामकाज का असंतुलन बना हुआ है। आईएएस की तरह ही कई आईपीएस ओवरलोड हैं तो कई खाली बैठे हैं, लेकिन इसकी फिक्र ना तो सरकार को है और ना ही महकमे के मुखिया को।
किसी के पास तीन तो किसी के पास एक भी नहीं
एडीजी राम सिंह मीणा के पास तीन चार्ज हैं। कानून व्यवस्था, सीबीसीआईडी और होमगार्ड। इसी तरह डीआईजी गढ़वाल रेंज संजय गुंज्याल के पास तो अंबार लगा है।
गुंज्याल अभी भी डीआईजी गढ़वाल आपदा प्रबंधन व एसडीआरएफ तो हैं ही साथ ही एंटी माइनिंग फोर्स के सीईओ भी हैं, जिसका कार्यक्षेत्र पूरा राज्य है।
सूत्रों की माने तो डीआईजी पीएसी अमित सिन्हा ने पीएसी की फाइलें तो करनी शुरू कर दीं, लेकिन एसडीआरएफ से संबंधित फाइल वह अभी भी संजय गुंज्याल को रेंज कार्यालय भेज रहे हैं।
डीआईजी कुमाऊं जीएस मर्तोलिया भी डीआईजी रेंज के साथ ही डीआईजी आपदा प्रबंधन व एसडीआरएफ कुमाऊं भी हैं। ऐसी ही अतिरिक्त जिम्मेदारियों ने समीकरण गड़बड़ा दिए हैं। जबकि चार-चार डीआईजी पूरी तरह से खाली बैठे हैं।
अभिसूचना व सुरक्षा विभाग
इस विभाग में एक आईजी, दो डीआईजी व दो पुलिस अधीक्षक तैनात हैं। प्राइम पोस्टिंग न मिलने पर कई अफसर 30 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ते के चक्कर में इंटेलीजेंस व सिक्यूरिटी में जाने का जुगाड़ लगाते हैं। वर्ना यहां इतने अफसरों का काम नहीं है।
स्टेट विजिलेंस विभाग
अन्वेषण करने वाले इस विभाग में शीर्ष पद महानिदेशक का है। इस पर एसके भगत तैनात हैं, लेकिन उनके नीचे सीधे पुलिस अधीक्षक विजय सिंह कार्की हैं। बीच में आईजी, डीआईजी कोई नहीं है, जबकि कई डीआईजी उपलब्ध हैं।
अपर सचिव बनने की कवायद
सीआरपीएफ से आए कमांडेंट धर्मेंद्र सिंह घुगत्याल की नियुक्ति शासन ने आईपीएस की पोस्ट पर की थी। उन्हें एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) का सेनानायक बनाया था।
लेकिन सप्ताह भर बीतने के बावजूद उन्होंने इस पद पर ज्वाइनिंग नहीं दी। सूत्रों की माने तो उन्होंने सीएम सचिवालय में अपर सचिव बनने का जुगाड़ लगाया है। बताया जा रहा है कि इस आशय का उनका प्रस्ताव भी तैयार हो रहा है।
आ सकते हैं और आउटसाइडर
कमांडेंट धर्मेंद्र सिंह घुगत्याल के बाद राज्य में पैरा मिलिट्री फोर्स के और भी अफसरों के आने की संभावना है। डिप्टी कमांडेंट स्तर के ये अफसर अपर पुलिस अधीक्षक के बराबर होंगे।
बताया जा रहा है कि सत्ता से जुड़ा एक गुट इन्हें प्रतिनियुक्ति पर लाकर प्रदेश कैडर में ही मर्ज करने की तैयारी में है। ताकि बाद में पदोन्नति कोटे से इन्हें आईपीएस बनाया जा सके। वहीं, पीपीएस एसोसिएशन में इसके विरोध की आहट सुनाई देने लगी है।