पिछले साल केदारनाथ में आई जलप्रलय ने रामबाड़ा को पूरी तरह खत्म कर दिया था। ये तो प्रकृति का कहर था जिसे रोक पाना शायद संभव नहीं था।
यात्रियों को दी गलत सूचनाएं
पर यहां तो चार धाम यात्रियों को सूचनाएं और सुविधाएं देने वाला महकमा पेन से रामबाड़ा को खत्म करने की बात कह रहा है।
जी हां! उत्तराखंड पर्यटन परिषद ने जब चार धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा दिग्दर्शिका और सूचना निदर्शिनी का प्रकाशन किया।
लाखों खर्च करने के बावजूद पर्यटन महकमा शायद जानबूझकर जलप्रलय को भूल गया और खत्म हुए स्थानों को भी नक्शे में दर्शा दिया।
साथ ही सूचना निदर्शिनी में भी इन स्थानों को सुरक्षित बताया। मामला खुला तो दोबारा से कुछ बदलाव कर दिए। काहिली देखिये फिर से पर्यटकों को गलत सूचनाएं देने का बीड़ा उठा लिया।
गौरीकुंड से केदारनाथ की पैदल दूरी इस बार 14 किलोमीटर की जगह 19 किलोमीटर तो बता दी। लेकिन नक्शे से रामबाड़ा वाले रूट को हटाना मुनासिब नहीं समझा।
पर्यटन सूचना केंद्रों पर पकड़ी गड़बड़ी
जबकि रामबाड़ा रूट के खत्म हो जाने से नया वैकल्पिक रूट निलचौली होते हुए बनाया गया है। अब जब दिग्दर्शिका दोबारा छपकर पर्यटन सूचना केंद्रों पर पहुंची तो गड़बड़ी फिर पकड़ में आई।
पर्यटन महकमे के अधिकारी अब मातहतों को निर्देश दे रहे हैं कि पेन पकड़ो और रामबाड़ा को काटकर नक्शे से ही पूरी तरह खत्म कर दो। ताकि पर्यटकों को रामबाड़ा नक्शे में भी नजर न आए।