भई ये ‘पावर’ भी अजीब है। बात हो रही है ‘पावर’ महकमे से जुड़े साहबों की ‘पावर’ की। एक छोटे साहब हैं, एक उनसे बड़े और एक उन दोनों से बड़े।
सबसे बड़े साहब, छोटे साहब से कुछ दिन से नाराज हैं। पहाड़ में रेल पहुंचाने के प्रोजेक्ट से जुड़े एक छोटे से काम का जिम्मा छोटे साहब को को दिया। लेकिन छह महीने में काम का सिरा नहीं पकड़ पाए। उनसे बड़े साहब को छोटे वाले साहब पर नकेल कसने को कहा। लेकिन वे भी नकेल नहीं कस पाए।
बड़े साहब ने खुद ही नकेल हाथ में ली और डाल दी छोटे साहब की नाक में। सुना है इस सब के पीछे रेल वाले साहब के साथ ‘पावर’ दिखाने का इनाम इन ‘पावर’ वाले छोटे साहब को मिला है। रेल वाले साहब के एक करीबी कभी इसी राज्य में ‘पावर’ के सबसे बड़े साहब हुआ करते थे।
ऐसे में ‘पावर’ के बड़े साहब कहां उनकी बात टालने वाले थे। अब ‘पावर’ के छोटे साहब कहते फिर रहे हैं कि साहब जब ‘आपदा’ आई तो हम सबसे आगे रहे।
जिन हाथों से आज आप हमारी नाक में नकेल डाल रहे हैं, इन्हीं हाथों से आपने ‘आपदा’ से निपटने में हमें इनाम दिया। बड़े साहब भी बड़े ही ठहरे। तपाक से सुना दिया कि इनाम ही तो दिया, गुंडई का लाइसेंस थोड़ा न दिया।