शनिदेव पृथ्वी तत्व के कारक हैं और वृश्चिक राशि जल तत्व की प्रतीक है। इन दोनों के मिलन की महत्वपूर्ण घटना आगामी दो नवंबर को रात 8:45 बजे होने जा रही है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राशि वृश्चिक
ज्योतिष शास्त्र गवाह है कि जब-जब भी ऐसा हुआ है। तब-तब कर्मवीरों और मेहनतकशों की बन आई है। अध्यात्म का उत्थान भी ऐसी युति में ही होता आया है। इस बार यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राशि वृश्चिक है।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि 15 दिसंबर को वृश्चिक राशि में चूंकि शनि के साथ सूर्य भी होंगे, अत: वह समय और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा। चिंता केवल यह है कि इन दोनों के एक राशि में होने पर केतु की निगाह सीधी पडे़गी।
जोधपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरि प्रकाश राठी के अनुसार शनि की गति सबसे मंथर है। वे एक राशि की यात्रा अढाई वर्ष में पूरी करते हैं। इसके विपरीत चंद्रमा सबसे तेज हैं, जो अढाई दिन में एक राशि की यात्रा पूरी कर लेते हैं।
फलित ज्योतिष में शनिदेव का स्थान न्याय के देवता का है। मान्यता है कि ब्रह्मा के क्रोध, विष्णु के चक्र और शिव के त्रिशूल से बचा जा सकता है, किंतु शनि के न्याय से नहीं।
दो नवंबर को शनि का वृश्चिक राशि में प्रवेश ब्रह्माण्ड के पृथ्वी और जल तत्व के मिलन से हरियाली और उद्योगों के लिए बेहद कारगर रहेगी। इनका मिलन आकाशीय ग्रहों की दृष्टि से भी अच्छे दिन लाएगा।