उनमें हुनर भी है और जज्बा भी। मगर कोच और जरूरी सुविधाओं की कमी फुटबॉल मैदान में उतरने की हिम्मत तोड़ देती है।
लड़कियां भी रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगी
फुटबॉल खेलने की इच्छुक दून की लड़कियों को जिला खेल विभाग तराशने जा रहा है। बीते साल शुरू हुई योजना के तहत नए सत्र के लिए लड़कियां भी रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगी।
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इसके बाद सरकारी फीस और सुविधा के साथ उन्हें पवेलियन, परेड ग्राउंड में खेल तराशने का मौका मिलेगा। फुटबॉल में पुरुषों के वर्चस्व के बीच देहरादून की अनीता रावत, रक्षा पंवार ने भारतीय टीम में शामिल होकर नया मुकाम बनाया।
मगर खेल सुविधाएं न मिलने से उन्हें भी बाहर का रुख करना पड़ा। मगर जिला खेल कार्यालय ने 2014-15 के खेल प्रशिक्षण शिविर में लड़कियों को भी प्रवेश देगा।
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फुटबॉल कोच राजेश ममगाई और पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर सीबी थापा यूं तो पुरुष खिलाड़ियों को कोचिंग देते हैं, मगर सूत्रों के मुताबिक लड़कियों की संख्या ज्यादा हुई तो लेडी कोच भी रखने की संभावना है।
राज्य खेल की हालत अच्छी नहीं
निजी स्कूलों में गर्ल्स फुटबॉल का स्तर काफी बेहतर है, लेकिन राज्य खेल होने के बावजूद सरकारी स्तर पर फुटबॉल बदहाल है।
वैसे तो दून के कई क्लब महिला खिलाड़ियों को बारीकियां सिखा रहे हैं, लेकिन पुरुष टीमों के मुकाबले गर्ल्स को कम वक्त मिल पाता है।
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पौड़ी, कोटद्वार, अगस्त्यमुनि आदि जगहों पर लड़कियां फुटबॉल खेल और सीख रही हैं। देहरादून फुटबॉल का गढ़ है। यहां भी लड़कियां राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। बीते साल से प्रवेश शुरू किया था, लेकिन जागरूकता के अभाव में ज्यादा खिलाड़ी नहीं आ सके। इस बार अधिक बालिकाओं को प्रवेश की कोशिश होगी।
- सतीश सार्की, जिला खेल अधिकारी