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गलन रोग की चपेट में आई अदरक की फसल

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साहिया क्षेत्र में सड़न और गलन रोग की चपेट में आई अदरक की फसल। - फोटो : VIKAS NAGAR
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साहिया। जौनसार बावर क्षेत्र में अदरक की फसल गलन रोग की चपेट में आ गई है। इससे काश्तकारों को समय से पहले ही फसल खोदनी पड़ रही है। इस कारण किसानों को अदरक का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार अब तक करीब 45 प्रतिशत फसल के रोग की चपेट में आने से खराब होने का अनुमान है।
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सुरेऊ के गुलाब सिंह, अलसी के गंभीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, पंचरा के दीवान सिंह, खमरोली के भजन सिंह ने बताया कि इस बार 5000 रुपये प्रति 40 किलो की दर से अदरक का बीज खरीदा था, लेकिन गलन रोग की चपेट में आने से फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। कहा कि फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। अदरक के पत्ते पीले पड़ने शुरू हो गए हैं और अदरक का कंद गलने लगा है। कुछ खेतों में अदरक की पत्तियां पीली पड़कर गिर चुकी हैं। दवाई के छिड़काव के बाद भी रोग पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
मालूम हो कि क्षेत्र के सुरेऊ, अलसी, सकनी, ककाड़ी, कनबुआ, कोठा तारली, खमरोली, शिबऊ, सलगा, चंदऊ, भंजरा, जिसऊ घराना, फटेउ, इछला, दातनू, बडनू गांव में अदरक की बंपर पैदावार की जाती है। यहां की फसल की सप्लाई दिल्ली, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद की मंडियों में की जाती है, लेकिन इस बार सितंबर माह में ही फसल गलन रोग की चपेट में आ गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। अमूमन अदरक की फसल की खुदाई अक्तूबर और नवंबर माह में की जाती है, लेकिन रोग की चपेट में आने के कारण दो माह पूर्व ही फसल की खुदाई की जा रही है।
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बरसात में अदरक की फसल में कवक जनित रोग फैलने शुरू हो जाते हैं। गांव-गांव जाकर लोगों को रोग के निवारण के बारे में जानकारी दी जा रही है। दो ग्राम कार्बेन्डाजिम का एक लीटर पानी में घोल बनाकर स्टीकर के साथ जड़ और तनों में डालकर अदरक की फसल को गलन रोग से बचाया जा सकता है।
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- डॉ. रामकुमार, केंद्र प्रभारी, उद्यान सचल दल
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